30 वर्षों से कायम है गुलजारबाग के ताजिया की अनूठी परंपरा, हर साल दिखती है कला और आस्था की मिसाल
बिना पेशेवर कारीगरों के ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से तैयार होता है ताजिया, इस वर्ष चांद की आकृति बनेगी आकर्षण का केंद्र

बरवाडीह : लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत छोटे से गांव गुलजारबाग में पिछले तीन दशकों से मुहर्रम के अवसर पर आकर्षक ताजिया निर्माण की परंपरा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। यह ताजिया न केवल बरवाडीह, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी अपनी भव्यता, कलात्मकता और अनूठी बनावट के कारण विशेष पहचान बना चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार विभिन्न प्रतियोगिताओं और आयोजनों में गुलजारबाग के ताजिया को कई बार प्रथम स्थान का सम्मान भी मिल चुका है। इस गौरवशाली परंपरा की शुरुआत वर्ष 1994 में गांव के निवासी रफीक आलम ने एक छोटे से ताजिया का निर्माण कर की थी। समय के साथ यह पहल पूरे गांव की पहचान बन गई। खास बात यह है कि आज भी ताजिया निर्माण के लिए किसी पेशेवर कारीगर की सहायता नहीं ली जाती, बल्कि ग्रामीण आपसी सहयोग, भाईचारे और सामूहिक श्रमदान से इसे तैयार करते हैं। इस वर्ष मिल्लते गुलजारबाग कमिटी के तत्वावधान में चांद की आकृति वाला विशेष ताजिया बनाया जा रहा है। अपनी आकर्षक बनावट और कलात्मक डिजाइन के कारण यह ताजिया लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कमिटी के सदर असलम अंसारी और सचिव समीम अंसारी के नेतृत्व में ग्रामीण दिन-रात मेहनत कर ताजिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। ताजिया निर्माण में फिरोज खान, सोहेल खान, अख्तर खान, मजहर आलम, याकूब खान, शाहरुख खान, सरफराज खान, सद्दाम खान, रिंकू खान, चिक्कू खान, जोहेब खान, जावेद खान, आफताब आलम, साबिर खान, रज्जन सहित अनेक ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ताजिया केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सामूहिक सहयोग की जीवंत मिसाल भी है। उनका विश्वास है कि वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक इसी तरह कायम रहेगी और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूत करेगी।