आदिवासी सामाजिक संगठन ने अनुसूचित क्षेत्रों में निकाय चुनाव पर रोक लगाने को ले राष्ट्रपति को भेजा पत्र
पत्र की प्रतिलिपि मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत सरकार, नई दिल्ली को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है।

By Ajay kumar
पाकुड़। आदिवासी संगठन “आदिवासी संता सुसर अखाड़ा, झारखंड” ने अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत एवं नगर निकाय चुनाव को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। इस संबंध में संगठन की ओर से महामहिम राष्ट्रपति के नाम डीसी कार्यालय को मंगलवार को पत्र सौंपा है।
संगठन के संविधान के क्षेत्रीय संयोजक सुरजू टुडू ने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 243(A) एवं 243 ZC का हवाला देते हुए कहा है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर निगम एवं नगर पालिका चुनाव संविधान की भावना के विरुद्ध हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में पेसा (PESA) कानून के अनुरूप व्यवस्था लागू नहीं है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि झारखंड में अनुसूचित क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले जिलों में पूर्व में भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए गए हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार यह रोक के दायरे में आता है। संगठन ने कहा कि पेसा नियमावली के अनुरूप व्यवस्था लागू नहीं होने से आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों, भूमि एवं परंपरागत व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है तथा स्थानीय समुदायों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि चुनाव कराए जाने से संविधान के मूल्यों और आदिवासी समाज के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
संगठन ने महामहिम राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एवं नगर निकाय चुनावों को तत्काल रद्द कराया जाए, ताकि संविधान की मूल भावना सुरक्षित रह सके। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत सरकार, नई दिल्ली को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है। मौके पर शिवचरण माल्टो, जोसेप सोरेन, रमेश टुडू सहित अन्य लोग मौजूद थे।