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असम के आदिवासियों को अधिकारों के लिए लडना होगा कानूनी लडाई : मुख्यमंत्री

रिपोर्ट: नूतन 4 घंटे पहलेझारखण्ड

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आप लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते क्रांतिकारी नेता प्रदीप नाग ने अपने प्राण की आहुति दी।

असम के आदिवासियों को अधिकारों के लिए लडना होगा कानूनी लडाई : मुख्यमंत्री

रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मंगलवार को आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम, जारी शक्ति और आदिवासी काउंसिल ऑफ असम की ओर से बिस्वनाथ चारियाली स्थित मेजिकाजन चाय बागान में आयोजित एक जनसभा में मंगलवार को शामिल हुए।

मौके पर मुख्यमंत्री कहा कि असम में निवास करने वाले गरीब-गुरबा, किसान, आदिवासी वर्ग के लोगों पर लम्बे समय से अत्याचार और शोषण की बातें लगातार मैंने सुनी है। उन्होंने कहा कि आप सभी लोगों ने यहां पर कई राजनीतिक और सामाजिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों वर्षों से आप सिर्फ असम नहीं बल्कि इस देश के चाय व्यापार जगत का अभिन्न अंग है।

आपके बूते ही चाय उद्योग चल रहा है। असम के आदिवासी समुदाय के वैसे लोग जो चाय उद्योग में कार्य करते हैं उन्हें काम के बदले मेहनताना के रूप में क्या मिलता है यह किसी से छिपा नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आप लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते क्रांतिकारी नेता प्रदीप नाग ने अपने प्राण की आहुति दी। उन्होंने कहा कि असम के आदिवासी समुदाय को उनका अधिकार मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राज्य झारखंड में भी जल, जंगल, जमीन का संरक्षण और आदिवासी समुदाय की पहचान एवं उनके अधिकार के लिए लम्बा संघर्ष हुआ। लगभग 50 वर्ष के संघर्ष के बावजूद जब परिणाम सकारात्मक नहीं रहा तब हमारे नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन सहित कई नेताओं ने अलग राज्य लेने का निर्णय किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग झारखंड राज्य बनने के बाद यह दुर्भाग्य रहा कि हमारे आदिवासी समुदाय के लोग आर्थिक, बौद्धिक और सामाजिक रूप से मजबूत नहीं बन सके। हमारी सरकार अब झारखंड के आदिवासी समुदाय के लोगों को उनका हक-अधिकार देने का कार्य निरंतर कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में रहने वाले आदिवासी भाई-बहनों को यहां एक बड़े परिवर्तन की रास्ते पर चलने की जरूरत है। इस परिवर्तन के लिए यह जरूरी है कि हम सभी लोगों को एक छत और एक छांव पर आना होगा। अब यहां के आदिवासी समुदाय को बौद्धिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी लोग उस समुदाय के लोग हैं जो संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटते हैं। आदिवासी समुदाय कभी भी किसी का बुरा नहीं चाहता है। किसी का शोषण या किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं रहा है। अब हम अपना हक-अधिकार कैसे लेंगे यह हम सभी को पता है। उन्हाेंने कहा कि आप सभी को संविधान से मिले अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि यह विडंबना है कि हजारों वर्षों से असम में निवास करने वाले आदिवासी समाज के साथ आखिर भेदभाव क्यों किया जा रहा है, उन्हें आदिवासी का दर्जा भी नहीं मिल रहा है। असम का एक बहुत बड़ा धड़ा कई यातनाओं से गुजर रहा है, इतना बड़ा समूह वर्तमान समय में अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थिति को बदलने के लिए हम सभी को चट्टान की तरह एकजुट रहना पड़ेगा।

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