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वात्सल्य बालिका गृह से दो नाबालिग फरार, जन सहभागी विकास केंद्र की कार्यशैली पर उठे सवाल

रिपोर्ट: MANISH 5 घंटे पहलेझारखण्ड

उद्घाटन के डेढ़ महीने में ही सुरक्षा व्यवस्था फेल, बालिका गृह संचालन में लापरवाही का आरोप

वात्सल्य बालिका गृह से दो नाबालिग फरार, जन सहभागी विकास केंद्र की कार्यशैली पर उठे सवाल

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना क्षेत्र स्थित जन सहभागी विकास केंद्र द्वारा संचालित वात्सल्य बालिका गृह से मंगलवार रात दो नाबालिग लड़कियों के फरार होने की घटना ने संस्था की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है जबकि पुलिस मामले की जांच और दोनों लड़कियों की तलाश में जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार फरार हुई दोनों लड़कियों में एक जमशेदपुर के पटमदा थाना क्षेत्र की रहने वाली है जबकि दूसरी सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात दोनों नाबालिग अचानक बालिका गृह से गायब हो गईं। घटना की जानकारी मिलने के बाद बालिका गृह प्रबंधन द्वारा संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई। इस संबंध में सीडब्ल्यूसी अधिकारी संतोष कुमार ठाकुर ने गम्हरिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस आसपास के इलाकों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड में तलाश अभियान चला रही है। साथ ही पूरे मामले में बालिका गृह प्रबंधन की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जा रही है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने जन सहभागी विकास केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि जिन नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी संस्था पर होती है वहां से दो लड़कियों का फरार हो जाना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। लोगों का आरोप है कि बालिका गृह में निगरानी व्यवस्था कमजोर थी जिसका फायदा उठाकर दोनों नाबालिग बाहर निकलने में सफल रहीं। उल्लेखनीय है कि बीते 15 अप्रैल को ही उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह द्वारा इस वात्सल्य बालिका गृह का उद्घाटन किया गया था। उद्घाटन के कुछ ही समय बाद इस तरह की घटना सामने आने से संस्था की तैयारियों और संचालन क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। नियमों के अनुसार किसी भी बालिका गृह में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था, महिला कर्मियों की निगरानी, सीसीटीवी कैमरे, नियमित उपस्थिति जांच और बच्चों की काउंसिलिंग अनिवार्य मानी जाती है। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या संस्था द्वारा इन मानकों का सही तरीके से पालन किया जा रहा था या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बालिका गृह में सुरक्षा और निगरानी मजबूत होती तो इस प्रकार की घटना नहीं होती। वहीं घटना के बाद संस्था और संबंधित अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। यहां तक कि प्राथमिकी दर्ज कराने वाले सीडब्ल्यूसी अधिकारी संतोष कुमार ठाकुर ने भी मीडिया के सवालों पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और दोनों नाबालिगों की तलाश जारी है।

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