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अंधविश्वास और अशिक्षा के खिलाफ युवा बनें बदलाव के वाहक : डालसा सचिव

रिपोर्ट: VBN News Desk22 घंटे पहलेझारखण्ड

डालसा सचिव राकेश रंजन ने कहा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उ

अंधविश्वास और अशिक्षा के खिलाफ युवा बनें बदलाव के वाहक : डालसा सचिव

मेदिनीनगर। समाज में बढ़ते अंधविश्वास, अशिक्षा और कानूनी अनभिज्ञता को दूर करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रत्येक विद्यार्थी को कानून का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए, ताकि वह अपने अधिकारों की रक्षा करने के साथ समाज में न्याय और जागरूकता का वाहक भी बन सके। यह बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पलामू के सचिव राकेश रंजन ने शुक्रवार को जीएलए कॉलेज, मेदिनीनगर में आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम में कहीं।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों को संविधान, विधिक अधिकारों, कर्तव्यों तथा निःशुल्क कानूनी सहायता संबंधी प्रावधानों की जानकारी देना था।

मुख्य अतिथि नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षित समाज वही है, जो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करे। उन्होंने विद्यार्थियों से संविधान के मूल्यों को अपनाते हुए न्याय, समानता, अनुशासन और संवैधानिक संस्कृति को मजबूत करने का आह्वान किया।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. जसबीर बग्गा ने कहा कि विधिक जागरूकता प्रत्येक नागरिक की मूल आवश्यकता है और इसके माध्यम से समाज में न्याय के प्रति विश्वास मजबूत होता है।

डालसा सचिव राकेश रंजन ने कहा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति के लिए न्याय पाने में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसी उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित एवं जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराता है।

उन्होंने महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, अनुसूचित जाति-जनजाति, दिव्यांगजनों के अधिकारों, साइबर अपराध से बचाव, घरेलू हिंसा, महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण, उपभोक्ता अधिकार तथा लोक अदालत की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी।

लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि डालसा गांव-गांव तक सुलभ न्याय पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है और अधिक से अधिक लोगों को कानूनी सहायता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में डॉ. लीना कुमारी, डॉ. विभा शंकर, डॉ. कुंदन कुमार, विकास तोपनो, अयाना एमएस सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

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