तिसरी में महिलाओं के लिए 15 दिवसीय लाह चूड़ी एवं जेवर निर्माण प्रशिक्षण शुरू
नाबार्ड प्रायोजित प्रशिक्षण से स्वरोजगार की राह होगी आसान, महिलाओं को सिखाए जा रहे आधुनिक डिज़ाइन

गिरिडीह : ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में 15 दिवसीय लाह चूड़ी एवं जेवर निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया और उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण सत्र में शामिल हुईं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक), गिरिडीह द्वारा प्रायोजित है, जबकि इसका संचालन पिन्स आर्ट एंड रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी, राजधनवार के माध्यम से किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को पारंपरिक लाह कला से जोड़ते हुए आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप आकर्षक चूड़ियां और आभूषण बनाने का प्रशिक्षण देना है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नाबार्ड, गिरिडीह के जिला विकास प्रबंधक हरिहरन ने दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण सत्र का विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने और इसे स्वरोजगार के अवसर में बदलने का आह्वान किया। संस्था के सचिव सुधीर कुमार ने बताया कि यह प्रशिक्षण पूरी तरह महिलाओं के कौशल विकास और आर्थिक सशक्तीकरण पर केंद्रित है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को लाह से आधुनिक एवं आकर्षक चूड़ियां, कंगन, हार, झुमके और अन्य आभूषण तैयार करने की तकनीक सिखाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण सत्र का समापन 3 जुलाई 2026 को होगा, जिसके बाद सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे ताकि वे स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकें। प्रशिक्षक दशरथ रविदास द्वारा महिलाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक नरेश कुमार अग्रवाल, कार्यक्रम प्रबंधक संजय कुमार, कार्यक्रम सहायक मोन्टी कुमार तथा विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित थीं। ग्रामीण महिलाओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें आत्मनिर्भर बनने और घरेलू आय बढ़ाने का बेहतर अवसर प्रदान करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि लाह उद्योग से जुड़ी यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और महिला उद्यमिता को नई दिशा दे सकती है।