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एसपी ऑफिस का पीए बनकर ठगा iPhone-16, रामगढ़ में शातिर साइबर ठग का नया कारनामा

रिपोर्ट: VBN News Desk1 घंटे पहलेझारखण्ड

वीआईपी नंबर और फर्जी ट्रांजैक्शन स्क्रीनशॉट दिखाकर 69 हजार का मोबाइल लेकर फरार, पुलिस जांच में जुटी

एसपी ऑफिस का पीए बनकर ठगा iPhone-16, रामगढ़ में शातिर साइबर ठग का नया कारनामा

रामगढ़ : साइबर ठग अब लोगों को ठगने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। ताजा मामला रामगढ़ का है जहां एक शातिर ठग ने खुद को पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय का पर्सनल असिस्टेंट (पीए) बताकर एक मोबाइल दुकानदार से करीब 69 हजार रुपये मूल्य का iPhone-16 ठग लिया। हैरानी की बात यह है कि ठग ने दो दिनों तक लगातार बातचीत कर दुकानदार का विश्वास जीत लिया और फर्जी पहचान के सहारे वारदात को अंजाम दे दिया। गोला रोड स्थित गणपति मोबाइल के संचालक धीरेंद्र कुमार ने इस संबंध में रामगढ़ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार 30 मई को उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एसपी कार्यालय का पीए बताते हुए एसपी मैडम के लिए पिंक कलर का iPhone-16 खरीदने की इच्छा जताई। दोनों के बीच मोलभाव के बाद मोबाइल की कीमत 69 हजार रुपये तय हुई। ठग ने स्वयं को अत्यधिक व्यस्त बताते हुए दुकान पर आने से असमर्थता जताई और मोबाइल की होम डिलीवरी एसपी कार्यालय या एसपी आवास तक करने को कहा। जब दुकान का कर्मचारी राजा दत्ता मोबाइल लेकर पहुंचा तब ठग ने फोन कर बताया कि वह रामगढ़ कोर्ट के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार (JH01DS-3268) में मौजूद है और वहीं डिलीवरी ले लेगा। मोबाइल प्राप्त करने के बाद ठग ने कर्मचारी को एक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट दिखाया जिसमें 69 हजार रुपये भेजे जाने का दावा किया गया था। कर्मचारी के वहां से लौटने के बाद जब स्क्रीनशॉट का सत्यापन किया गया तो पता चला कि दुकान के खाते में कोई राशि नहीं पहुंची है। इसके बाद ठग ने बहाना बनाया कि उसके खाते से पैसा कट चुका है और वह बैंक विवरण दिखाने दुकान आएगा लेकिन वह न तो आया और न ही मोबाइल वापस मिला। रामगढ़ थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडे ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कॉल करने वाला व्यक्ति एक पेशेवर ठग था जिसने फर्जी मोबाइल नंबर और वाहन नंबर का इस्तेमाल किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी की तलाश जारी है। थाना प्रभारी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान केवल फोन कॉल, ट्रूकॉलर या वीआईपी नंबर के आधार पर सत्यापित न करें। किसी भी प्रकार का सामान, धनराशि या ऑनलाइन लेन-देन पूरी तरह सत्यापित होने के बाद ही करें। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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