सरना स्थलों के संरक्षण और विकास पर बनी कार्ययोजना
डुमरी में सामाजिक बैठक आयोजित, संस्कृति और परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ने पर जोर; धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों को व्यवस्थित करने का लिया संकल्प

By Bhim Prasad डुमरी। डुमरी सरना स्थल स्थित धूमकुड़ियां भवन परिसर में रविवार को सामाजिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में आदिवासी समाज के धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के संरक्षण, संवर्धन और विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। समाज के लोगों ने पारंपरिक धार्मिक स्थलों को व्यवस्थित करने के साथ आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक विरासत से जोड़ने पर जोर दिया। इस दौरान धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के विकास को लेकर आगामी कार्ययोजना की रूपरेखा भी तैयार की गई।
बैठक में बीरेंद्र भगत ने कहा कि सरना स्थल आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। इन स्थलों की पवित्रता और परंपराओं को सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास के साथ वहां आवश्यक सुविधाएं बढ़ाने और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास करने की जरूरत है।
जून उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी है। सरना स्थल और धूमकुड़ियां जैसे स्थान केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सामुदायिक विचार-विमर्श के महत्वपूर्ण स्थल भी हैं। उन्होंने इनके संरक्षण और विकास के लिए समाज के सभी वर्गों से मिलकर ठोस पहल करने की अपील की।
बैठक में चरणबद्ध तरीके से कार्ययोजना बनाकर काम करने पर बल दिया गया। समाज के लोगों ने आपसी एकजुटता बनाए रखने और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों को मजबूत करने का संकल्प लिया। मौके पर अमूल भगत, बच्चू उरांव, सुरेश भगत, श्रीराम उरांव, जगदीश भगत, जगसाय उरांव सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे।