गम्हरिया दुष्कर्म कांड में शंकर दास की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, कथित शादी और उम्र निर्धारण की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं?
जेल जाते समय ठीक से चल नहीं पा रहा था शंकर दास! हिरासत में पिटाई की आशंका जता रहे स्थानीय लोग

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना दुष्कर्म कांड में पीड़िता के कथित पति शंकर दास की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। पीड़िता की मां के आवेदन पर पुलिस ने बुधवार को शंकर दास को नाबालिग के अपहरण और यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि शंकर दास के पूर्व में दिए गए बयान और स्थानीय लोगों द्वारा सामने रखे जा रहे तथ्यों के आधार पर मामले के कई पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। शंकर दास के पूर्व बयान के अनुसार करीब छह महीने पहले एक व्यक्ति युवती को उसके होटल में काम दिलाने के लिए लेकर आया था। उस व्यक्ति ने युवती को काम पर रखने का अनुरोध किया था। शंकर दास ने युवती से आधार कार्ड मांगा लेकिन उसने दस्तावेज उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई। शंकर दास का कहना है कि युवती की दयनीय स्थिति को देखते हुए उसने उसे अपने होटल में काम पर रख लिया। कुछ दिनों बाद उसने युवती के सामने शादी का प्रस्ताव रखा जिस पर युवती और उसकी मां राजी हो गईं। इसके बाद गांव के ही मंदिर में दोनों ने शादी कर ली। शंकर दास के मुताबिक शादी के कुछ दिनों बाद उसकी सास अपनी छोटी बेटी के साथ उससे और उसकी पत्नी से मिलने घर आई थी। इस दौरान वह करीब दो महीने तक शंकर दास के घर पर रही। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि यह जानकारी सही है तो पुलिस ने पीड़िता की मां की मौजूदगी और कथित शादी से जुड़े तथ्यों की जांच किस स्तर पर की? जब युवती के पास आधार कार्ड नहीं था और उसने अपनी उम्र के संबंध में दस्तावेज नहीं दिए थे तो शंकर दास को उसकी वास्तविक उम्र की जानकारी कैसे थी?
हिरासत में पिटाई की आशंका पर भी सवाल
इस मामले में स्थानीय लोगों ने एक और गंभीर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जेल जाते समय शंकर दास ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। इसी आधार पर लोगों ने आशंका जताई है कि थाने में पूछताछ के दौरान उसके साथ मारपीट की गई होगी। हालांकि हिरासत में पिटाई की बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से भी इस आरोप पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसके अलावा कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस के वरीय अधिकारियों ने आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने के उद्देश्य से पीड़िता के गांव जाकर कथित तौर पर जाली दस्तावेज तैयार करवाए और उसे नाबालिग दर्शाया। यह गंभीर आरोप है, जिसकी स्वतंत्र जांच और दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि आवश्यक है। ऐसे में सवाल है कि पुलिस ने युवती की उम्र का निर्धारण किन प्रमाणों के आधार पर किया? कथित शादी और मां की दो महीने तक घर में मौजूदगी के दावे की जांच हुई या नहीं? साथ ही शंकर दास के शरीर पर चोट के निशान या चलने में परेशानी की वजह की चिकित्सकीय जांच कराई गई है या नहीं? इन सभी बिंदुओं पर पुलिस का स्पष्ट पक्ष सामने आना चाहिए ताकि मामले की निष्पक्षता और जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।