आरआईटी के कुलुपटाँगा बस्ती में महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करने का आरोप, घर के सामने भसुर के बेटे की अस्थियां दफनाने से दहशत
बच्चे को खाने का लगाया आरोप, पति-बच्चों समेत जान से मारने की धमकी का दावा, पद्मश्री छुटनी महतो से लगाई सुरक्षा की गुहार

आदित्यपुर : सरायकेला-खरसावां जिले के आरआईटी थाना क्षेत्र अंतर्गत आदित्यपुर-2 स्थित कुलुपटांगा बस्ती, रोड नंबर-14 की रहने वाली बीपा मुंडरी ने अपने भसुर सुखराम मुंडरी उर्फ राम मुंडरी पर वर्ष 2021 से लगातार डायन बताकर मानसिक प्रताड़ना देने और परिवार को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर पीड़िता ने थाना स्तर पर समझौते और बाद में परिवार परामर्श केंद्र के माध्यम से मदद की गुहार लगाई है। पीड़िता के अनुसार पूर्व में महिला समिति के हस्तक्षेप से दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से प्रताड़ना बंद नहीं हुई। आवेदन में बीपा मुंडरी ने बताया है कि वह अपने पति और तीन बच्चों के साथ रहती हैं। आरोप है कि हाल में भसुर के बेटे की मौत के बाद उन पर अंधविश्वास आधारित गंभीर आरोप लगाया गया। पीड़िता का दावा है कि बेटे की मौत के बाद उसके भसुर ने मृत बेटे की अस्थि को उसके घर के दरवाजे के सामने ही दफना दिया। आवेदन में कथित धमकी का भी उल्लेख है कि उसके बेटे की मौत के लिए बीपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया कि शव उसके घर के सामने इसलिए दफनाया गया है ताकि मृत बेटा भी उसे खा सके। बता दें कि अदिबासी समाज में मृत शरीर के अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को किसी खास स्थान पर दफना दिया जाता है और वहां पत्थरगढ़ी की जाती है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि इसके बाद उसके पति, बच्चों और उसे जान से मारने की धमकी दी गई। आवेदन के मुताबिक घटना के बाद पूरा परिवार भय के माहौल में है और सुरक्षा के लिए इधर-उधर रहने को मजबूर है। मामले में परिवार की ओर से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की गई है। इसी क्रम में पीड़ित परिवार ने पद्मश्री से सम्मानित छुटनी महतो के परिवार परामर्श केंद्र पहुंचकर अपनी शिकायत रखी। छुटनी महतो ने परिवार को न्याय और हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिया तथा प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने उचित कार्रवाई नहीं होने पर मामले को उच्च स्तर तक उठाने की बात कही है। बता दें कि झारखंड में डायन प्रथा के खिलाफ अलग कानून भी लागू है जिसका उद्देश्य ऐसी सामाजिक कुप्रथा और उससे जुड़ी हिंसा पर रोक लगाना है।