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पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार

रिपोर्ट: Santosh Kumar12 घंटे पहलेझारखण्ड

खेती करने से रोकने और जान से मारने की धमकी का आरोप, लातेहार एसपी से कानूनी कार्रवाई की मांग

पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार

लातेहार : जिले के चंदवा थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर (जामुनटोला) निवासी मुकेश अगेरिया ने अपनी पुश्तैनी कृषि भूमि पर कथित रूप से जबरन कब्जा, खेती करने से रोकने और जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक, लातेहार को आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में मुकेश अगेरिया ने बताया है कि मौजा रामपुर, थाना संख्या-252 के आर.एस. खाता संख्या-69, प्लॉट संख्या-113 सहित कुल 5.10 एकड़ भूमि के खतियानी रैयत तेतरा अगेरिया, बरतु अगेरिया एवं ललु अगेरिया हैं। उन्होंने बताया कि वे बरतु अगेरिया के पोते हैं और उक्त भूमि पर उनके परिवार का वैध अधिकार है। भूमि का ऑनलाइन लगान (रसीद) आज भी उनके दादा बरतु अगेरिया के नाम से नियमित रूप से कट रहा है, जो स्वामित्व का दस्तावेजी प्रमाण है। मुकेश अगेरिया ने आरोप लगाया कि गांव के मोहन महतो एवं मंटू लोहरा ने कथित रूप से उनकी पुश्तैनी भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। जब भी उनका परिवार खेत में कृषि कार्य करने जाता है तब आरोपित गाली-गलौज, मारपीट तथा जान से मारने की धमकी देकर उन्हें भगा देते हैं। इसके कारण परिवार अपनी जमीन पर खेती नहीं कर पा रहा है और आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अंचलाधिकारी, चंदवा एवं थाना चंदवा को भी पूर्व में लिखित शिकायत दी जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई, भूमि पर वैधानिक कब्जा दिलाने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। भूमि विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान: यदि किसी व्यक्ति का नाम खतियान एवं राजस्व अभिलेखों में दर्ज है और उसके नाम से नियमित लगान जमा हो रहा है तो उसे अपने अधिकार के समर्थन में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। हालांकि, किसी भी भूमि पर अंतिम स्वामित्व अथवा कब्जे का निर्धारण सक्षम राजस्व न्यायालय या सिविल न्यायालय के आदेश तथा प्रशासनिक जांच के आधार पर होता है। यदि किसी व्यक्ति को जबरन खेती से रोका जाता है, मारपीट या जान से मारने की धमकी दी जाती है, तो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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