मनरेगा कूप निर्माण में बड़ा घोटाले का आरोप, तीन साल से अधूरा गड्ढा बना ग्रामीणों और मवेशियों के लिए मौत का जाल
20 हजार रुपये नहीं देने पर रोक दिया कूप निर्माण? राशि निकासी, नियमों की अनदेखी और विभागीय लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

गिरिडीह : तिसरी प्रखंड के गुमगी पंचायत अंतर्गत सिंगराडीह-लोहारटोला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत स्वीकृत कूप निर्माण योजना में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। करीब तीन वर्ष पूर्व महादेव लोहार की निजी भूमि पर योजना के तहत जेसीबी से गड्ढा खोदकर निर्माण कार्य शुरू किया गया था लेकिन आज तक कूप का निर्माण पूरा नहीं हो सका। परिणामस्वरूप अधूरा और खुला पड़ा गड्ढा ग्रामीणों, बच्चों और मवेशियों के लिए लगातार दुर्घटना का कारण बनने की आशंका पैदा कर रहा है। ग्रामीण अनिल विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य आगे बढ़ाने के लिए मेठ द्वारा उनसे 20 हजार रुपये की मांग की गई थी। रुपये देने से इनकार करने के बाद काम पूरी तरह बंद कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजना को निजी कमाई का जरिया बना दिया गया जबकि लाभुक आज भी योजना के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं। निवर्तमान रोजगार सेवक जितेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि कूप निर्माण उनके कार्यकाल में शुरू हुआ था और योजना में "कुछ राशि की निकासी भी हुई है", हालांकि उन्होंने निकाली गई राशि का स्पष्ट विवरण नहीं दिया। उन्होंने कार्य रुकने का कारण जमीन से जुड़े गोतिया विवाद को बताया। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया भी सवालों के घेरे में है। मनरेगा बीपीओ पंकज कुमार ने कहा कि उन्हें इस योजना की जानकारी नहीं है जबकि पंचायत सचिव पांडेय ने स्वयं को नया पदस्थापित बताते हुए मामले से अनभिज्ञता जताई। दूसरी ओर आजसू नेता नारायण यादव ने आरोप लगाया कि बीपीओ, जूनियर इंजीनियर और पंचायत स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना योजना की राशि का भुगतान संभव नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना से संबंधित सूचना पट्ट (डिस्प्ले बोर्ड) को भी जानबूझकर हटा या क्षतिग्रस्त कर दिया गया ताकि योजना की लागत, स्वीकृति और भुगतान संबंधी जानकारी छिपाई जा सके। मौके पर केवल दो ट्रॉली पत्थर गिराकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। धर्मेंद्र विश्वकर्मा, सचिन विश्वकर्मा, दीपक विश्वकर्मा, प्रेम विश्वकर्मा समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि बरईपाट गांव में भी इसी तरह अधूरे छोड़े गए कुएं में गिरकर एक बच्चे की मौत हो चुकी है। ऐसे में सिंगराडीह का यह खुला गड्ढा भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इधर तिसरी के बीडीओ मनीष कुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि शिकायत मिली है और पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि अनियमितता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों एवं दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि अधूरे कूप का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए अथवा सुरक्षा मानकों के अनुरूप उसे बंद कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान न जाए।