जेएसएससी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को दबोचा, जांच में बड़े नेटवर्क के संकेत
एसपी मनोज स्वर्गियारी बोले- साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही जांच, गिरोह से जुड़े अन्य लोगों पर भी होगी कार्रवाई

चौका : जेएसएससी पीजीटी शिक्षक भर्ती में नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से ठगी करने के मामले में सरायकेला-खरसावां पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। चौका थाना कांड संख्या-27/2026 में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी के बाद पुलिस ने अनुसंधान के क्रम में एक अन्य आरोपी अमित कुमार उर्फ आर्यन को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में कथित नौकरी ठगी गिरोह के तार और गहरे होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस के अनुसार चौका थाना क्षेत्र निवासी गुरुचरण साव की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि सरकारी अधिकारी-कर्मचारी से संबंध होने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से नियुक्ति दिलाने के नाम पर सुरक्षा राशि के रूप में मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, ब्लैंक चेक और अन्य दस्तावेज लिए जाते थे तथा चयन सूची में नाम आने का भरोसा देकर मोटी रकम वसूली जाती थी। अनुसंधान के दौरान पहले आरोपी सुशील कुमार को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से मोबाइल फोन, आधार कार्ड, जेएसएससी पीजीटी के एडमिट कार्ड, मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, अभ्यर्थियों से जुड़े दस्तावेज, छह ब्लैंक चेक सहित कई महत्वपूर्ण सामग्री बरामद हुई थी। पुलिस ने स्पष्ट किया था कि अब तक की जांच में जेएसएससी या उसके किसी अधिकारी-कर्मचारी की प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने नहीं आई है, जबकि मामले की जांच जारी है। इसी कड़ी में चौका थाना प्रभारी गौरव कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने गिरिडीह निवासी अमित कुमार उर्फ आर्यन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बताया गया कि आरोपी रांची में एक कोचिंग सेंटर संचालित करता है। उसके कब्जे से कई ब्लैंक चेक एवं एक बोलेरो वाहन भी जब्त किया गया है। पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने कहा कि पूरे मामले की जांच तकनीकी, वैज्ञानिक एवं मानवीय साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रारंभिक रूप से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों के साथ धोखाधड़ी का मामला प्रतीत होता है। यदि अनुसंधान के दौरान किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने युवाओं से अपील की कि सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति को रुपये, ब्लैंक चेक या मूल प्रमाण-पत्र न दें तथा ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।