बरवाडीह के बरखेता-द्वारपार सरना स्थल चारदीवारी निर्माण में अनियमितता का आरोप, ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग
घटिया सामग्री और बिना सूचना पट्ट के चल रहा निर्माण कार्य, आदिवासी आस्था स्थल में लापरवाही पर ग्रामीणों में नाराजगी

बरवाडीह, लातेहार : बरवाडीह प्रखंड के सुदूरवर्ती एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्र लात पंचायत के बरखेता-द्वारपार स्थित सरना स्थल की चारदीवारी निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए प्रशासन से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरना स्थल आदिवासी समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र होता है, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसे पवित्र स्थल के विकास कार्य में लापरवाही और अनियमितता से लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन दिनों सरना स्थल की चारदीवारी का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आरोप है कि दीवार, कॉलम और बीम निर्माण में बांग्ला ईंट और कमजोर सामग्री का उपयोग किया जा रहा है जिससे निर्माण की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह कार्य चलता रहा तो कुछ ही समय में दीवारों में दरारें पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि निर्माण स्थल पर अब तक किसी प्रकार का शिलान्यास नहीं किया गया है और न ही योजना से संबंधित कोई सूचना पट्ट लगाया गया है। इससे योजना की कुल लागत, प्राक्कलन राशि, निर्माण एजेंसी या संवेदक की जानकारी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही है। पारदर्शिता के अभाव को लेकर भी स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
निर्माण कार्य से जुड़े प्रमुख नियम
सरकारी योजनाओं के तहत किसी भी निर्माण कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना अनिवार्य होता है। नियमों के अनुसार कार्य स्थल पर योजना से संबंधित सूचना पट्ट लगाना आवश्यक होता है जिसमें योजना की लागत, स्वीकृत राशि, कार्य एजेंसी और निर्माण अवधि की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा निर्माण कार्य निर्धारित प्राक्कलन, तकनीकी मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण के तहत ही कराया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सरना स्थल की चारदीवारी निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि अनियमितता या घटिया सामग्री के उपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आस्था स्थल के विकास कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।