सरहुल के नाम पर जमीन कब्जाने का आरोप, एसडीएम और मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों पर मिलीभगत का गंभीर आरोप
मोबाइल छीनकर तीन घंटे बंधक बनाने का याचिकाकर्ता ने लगाए आरोप, निजी जमीन पर आयोजन के खिलाफ न्याय की गुहार

चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में सरहुल पर्व के आयोजन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। चांडिल गोलचक्कर में आयोजित प्रेस वार्ता में याचिकाकर्ता सूर्या पद महतो एवं अन्य ने चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी विकास राय और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के रिश्तेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि झारखंड दिशोम (बाहा) सरहुल कमेटी के पदाधिकारी दिलीप किस्कू, गुरुचरण किस्कू, चारु चांद किस्कू समेत अन्य प्रशासनिक मिलीभगत से उनकी निजी रैयती जमीन पर सरहुल पर्व के नाम पर कब्जा करने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सूर्या पद महतो ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बाद जब वे अपने वैध दस्तावेजों के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचे तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया और लगभग तीन घंटे तक कार्यालय में बैठाए रखा गया। इस दौरान संबंधित कमेटी के लोग भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि इस वजह से वे समय पर उच्च न्यायालय में रिसीविंग प्रस्तुत नहीं कर सके। याचिकाकर्ता के अनुसार वर्ष 2024 में खाता संख्या 52 की लगभग 9 डिसमिल भूमि का अधिग्रहण एनएचएआई द्वारा किया गया था जबकि शेष भूमि उनकी निजी रैयती है। इसके बावजूद 21 मार्च 2026 को उसी भूमि पर सरहुल पर्व का आयोजन किया गया। इस संबंध में चांडिल थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन भी दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सरहुल जैसे पवित्र आदिवासी पर्व के विरोधी नहीं हैं बल्कि बिना अनुमति निजी भूमि पर आयोजन का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल जमीन का नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों और कानून के सम्मान का है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि किसी भी निजी (रैयती) भूमि पर बिना स्वामी की अनुमति आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, उच्च न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए, संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी एवं आरोपित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो, भूमि से जुड़े वैध दस्तावेजों और लगान रसीद को प्राथमिक साक्ष्य माना जाए, दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कर पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान की जाए तथा प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रेस वार्ता में सूर्या पद महतो, जय महतो समेत अन्य ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी खतियानी जमीन पर अधिकार चाहते हैं और इसके लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। यह मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली, कानून व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवाद में क्या कदम उठाता है और पीड़ितों को न्याय कब तक मिल पाता है।