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ऑक्सीजन पाइप फटने से एसएनसीयू में मचा हड़कंप, सांसद मनीष जायसवाल की त्वरित पहल से टला बड़ा हादसा

रिपोर्ट: Anuj sinha39 दिन पहलेझारखण्ड

नवजातों की जिंदगी पर मंडराया संकट, सांसद की संवेदनशीलता और तत्पर कार्रवाई से बहाल हुई ऑक्सीजन सप्लाई

ऑक्सीजन पाइप फटने से एसएनसीयू में मचा हड़कंप, सांसद मनीष जायसवाल की त्वरित पहल से टला बड़ा हादसा

हजारीबाग : शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में सोमवार देर रात ऑक्सीजन पाइपलाइन फटने और उसमें आग लग जाने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के कारण पूरे एसएनसीयू की ऑक्सीजन आपूर्ति अचानक ठप हो गई जिससे वहां भर्ती कई नवजात शिशुओं, विशेषकर वेंटिलेटर पर उपचाराधीन तीन बच्चों की जान पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया। हालांकि समय रहते किए गए प्रयासों और सांसद मनीष जायसवाल की त्वरित संवेदनशील पहल से एक बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार रात करीब 11 बजे एसएनसीयू के बाहर जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर से जुड़ा पाइप अचानक फट गया और उसमें आग लग गई। ऑक्सीजन आपूर्ति बाधित होते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। बच्चों के परिजन घबराकर इधर-उधर दौड़ने लगे। इसी बीच एक नवजात के परिजन जितेंद्र कुमार सिंह ने तत्काल हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल को घटना की सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने बिना देर किए अपने मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी को अस्पताल भेजा और स्वयं भी ड्यूटी पर तैनात महिला शिशु रोग विशेषज्ञ से दूरभाष पर बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। सांसद ने निर्देश दिया कि यदि आवश्यकता पड़े तो बच्चों को तत्काल निजी अस्पतालों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाए। सांसद के निर्देश पर रंजन चौधरी तत्काल अस्पताल पहुंचे और उपाधीक्षक डॉ. राजकिशोर तथा शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. क्षितिज आनंद से संपर्क कर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया। इसके बाद तकनीकी टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त पाइप को बदलकर ऑक्सीजन आपूर्ति पुनः बहाल कर दी गई। घटना के दौरान आग बुझाने के प्रयास में एक वार्ड बॉय का हाथ हल्का झुलस गया। एहतियातन अस्पताल प्रशासन ने निजी अस्पतालों से भी संपर्क कर बैकअप व्यवस्था तैयार रखी थी, लेकिन समय रहते मरम्मत कार्य पूरा होने से नवजातों को स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। सांसद प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऑक्सीजन पाइपलाइन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था का नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह घटना भयावह रूप ले सकती थी। इस घटना ने अस्पतालों में ऑक्सीजन पाइपलाइन, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और नियमित तकनीकी निरीक्षण की आवश्यकता को फिर से उजागर कर दिया है। स्वास्थ्य संस्थानों में आपातकालीन सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन और नियमित मेंटेनेंस अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मेडिकल संस्थानों में ऑक्सीजन नेटवर्क, अग्निशमन उपकरणों और आपदा प्रबंधन प्रणाली का समय-समय पर ऑडिट किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने सांसद मनीष जायसवाल की संवेदनशीलता और त्वरित हस्तक्षेप की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सक्रियता से कई मासूम जिंदगियां सुरक्षित बच सकीं और एक संभावित बड़ी त्रासदी टल गई।

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