चंद्रवंशी समाज के अस्तित्व व गौरव पर प्रहार नहीं होगा बर्दाश्त : अरुणा शंकर
क्या मेदिनीनगर फिर से दहशतगर्दी के काले दौर में खो जाएगा, समाज की एकजुटता ही देगी करारा जवाब

मेदिनीनगर (पलामू) : नगर निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मेदिनीनगर की प्रथम महापौर सह वर्तमान महापौर प्रत्याशी अरुणा शंकर ने शहर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति व एक विशेष समाज को हाशिए पर धकेलने की साजिशों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने समाज के प्रबुद्ध वर्ग व युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज मेदिनीनगर के लोकतंत्र पर नहीं बल्कि हमारे पूर्वजों की विरासत व आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व पर हमला हो रहा है। अरूणा शंकर ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर क्यों एक सोची-समझी रणनीति के तहत चंद्रवंशी समाज के स्थापित व लड़ाकू नेतृत्व को मुख्यधारा से बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज जनता पूछ रही है कि प्रदीप अकेला जैसा जनप्रिय चेहरा चुनावी समर से दूर क्यों है। वार्ड नंबर 23 की धड़कन धीरज राज की सक्रियता को किसने नजरअंदाज किया। कोमल कुमार अंकु व मुकेश राज चंद्रवंशी जैसे युवाओं के प्रेरणास्रोत नेताओं को मुख्यधारा से बाहर क्यों धकेला गया। उन्होंने हमीदगंज के बीएन कॉलेज रोड पर वर्षों से बसे चंद्रवंशी परिवारों को उजाड़ने की कोशिशों व वार्ड 21 से अंजना देवी को चुनाव लड़ने से रोकने के प्रयासों को एक राजनीतिक साजिश करार दिया।
शहर के सन्नाटे को तूफान की आहट बताते हुए अरूणा शंकर ने आगाह किया कि मेदिनीनगर फिर से अराजकता व गुंडागर्दी के दलदल की ओर बढ़ रहा है। कहा कि एक समाज की रीढ़ तोड़कर शहर पर फिर से खौफ का शासन स्थापित करने की बिसात बिछाई जा रही है। कहा कि लोकतंत्र डराने वालों से नहीं बल्कि निडर नागरिकों से चलता है। अगर आज मौन रहें तो आने वाली पीढ़ी पूछेगी कि जब शहर को जनमत के बजाय खौफ से चलाया जा रहा था, तब हम कहां थे। चंद्रवंशी समाज के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराते हुए अरुणा शंकर ने कहा कि यह समाज महाराज ययाति के न्याय व महाराज जरासंध की वीरता का उत्तराधिकारी है। यह समाज मगध के विजेता हैं।
कहा कि समाज का इतिहास कायरता का नहीं बल्कि साम्राज्य निर्माण का रहा है। जिस समाज का इतिहास इतना तेजस्वी हो, वह चंद डराने-धमकाने वाले तत्वों के सामने कभी घुटने नहीं टेकेगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव केवल हार-जीत का नहीं बल्कि मेदिनीनगर की गलियों को भयमुक्त रखने और अपनी अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है।अरुणा शंकर ने लोगों से कहा कि अपने हक और जमीन के लिए जागें। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाज-नीति को प्राथमिकता दें। चुप्पी तोड़ें, क्योंकि इस समाज की खामोशी ही विरोधियों की ताकत बन रही है।