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CAG की रिपोर्ट ने खोली झारखंड की योजनाओं की पोल, 1.60 लाख करोड़ के खर्च का हिसाब लंबित

रिपोर्ट: VBN News Desk19 घंटे पहलेझारखण्ड

327 करोड़ के राजस्व पर असर, मनरेगा के 50 लाख से अधिक काम अधूरे; 6.32 लाख पात्र परिवार पीएम आवास से वंचित, 2.90 लाख अपात्र लाभुक सूची में शामिल

CAG की रिपोर्ट ने खोली झारखंड की योजनाओं की पोल, 1.60 लाख करोड़ के खर्च का हिसाब लंबित

रांची। झारखंड में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, राजस्व संग्रह और वित्तीय प्रबंधन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (उअ‍ॅ) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को विधानसभा के पटल पर रखी गयी रिपोर्ट में कई विभागों में नियमों की अनदेखी, कमजोर निगरानी और वित्तीय प्रबंधन में खामियों का उल्लेख किया गया है। सबसे गंभीर मामला 1,60,565.80 करोड़ रुपये से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के लंबित रहने का है। यानी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद संबंधित विभाग यह प्रमाणित नहीं कर सके कि राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में राज्य का पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की तुलना में 2,160 करोड़ रुपये घट गया। इसका असर परिसंपत्तियों के निर्माण और विकास योजनाओं की गति पर पड़ा। उअ‍ॅ ने परिवहन, वाणिज्य कर, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली में भी कई स्तर पर खामियां चिह्नित की हैं।

मनरेगा में काम अधूरे, मजदूरी भी लंबित

मनरेगा के क्रियान्वयन पर भी रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाये हैं। वर्ष 2019-24 के दौरान प्रस्तावित कार्यों में महज 27 फीसदी काम ही पूरे हो सके, जबकि करीब 49 फीसदी यानी 50.21 लाख काम अधूरे रह गये। इन कार्यों पर 2,633 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। मार्च 2025 तक मजदूरों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी भी लंबित थी। रिपोर्ट में मनरेगा की राशि से वाहनों की मरम्मत और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मियों को भुगतान किये जाने के मामले भी सामने आये हैं।

जल जीवन मिशन में लक्ष्य से काफी पीछे राज्य

जल जीवन मिशन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। राज्य में केवल 55 फीसदी ग्रामीण घरों तक ही नल से जल पहुंच पाया था, जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 80 फीसदी बताया गया है। वहीं, करीब 24 फीसदी गांवों में एक भी घर में नल का कनेक्शन नहीं मिला। इससे योजना के जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी पर सवाल उठते हैं।

पीएम आवास में पात्र बाहर, अपात्र अंदर

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में भी लाभुक चयन और लक्ष्य निर्धारण में विसंगतियां सामने आयीं। राज्य में 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की गयी थी, लेकिन केंद्र से केवल 16.02 लाख परिवारों का लक्ष्य मिला। इस तरह 6.32 लाख पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गये। दूसरी ओर, करीब 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम लाभुक सूची में शामिल कर दिये गये, जिन्हें बाद में हटाया गया। पूर्ण हो चुके करीब आठ फीसदी आवासों में शौचालय की सुविधा भी नहीं मिली।

परिवहन विभाग में नियमों की अनदेखी

परिवहन विभाग में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आयीं। पांच जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र के 305 आवेदकों को गियर वाली मोटरसाइकिल का लाइसेंस जारी कर दिया गया। सारथी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण यह संभव हुआ। इसके अलावा अस्थायी पंजीकरण की वैधता छह महीने के बजाय एक माह रखे जाने से 327.35 करोड़ रुपये के राजस्व पर असर पड़ा। ऑडिट में 6,640 ऐसे वाहन भी मिले, जिनका अस्थायी पंजीकरण होने के बाद स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया। करीब 1.24 लाख वाहनों पर टैक्स बकाया पाया गया।

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