बालू माफिया फिर बेखौफ, छापेमारी के दौरान चालक ट्रैक्टर छोड़कर फरार
परशुरामडीह के ग्रामीणों का कहना है कि नदी से हर दिन दर्जनों ट्रैक्टर अवैध बालू उठाते और ढोते हैं। इससे नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है।

बेंगाबाद: अवैध बालू खनन पर लगाम लगाने के प्रशासनिक दावों की एक बार फिर हवा निकल गई। सोमवार को बेंगाबाद थाना प्रभारी अमन कुमार सिंह और अंचल अधिकारी सफी आलम के नेतृत्व में परशुरामडीह गांव के समीप हुई संयुक्त छापेमारी में पुलिस के हाथ सिर्फ एक बालू लदा ट्रैक्टर ही लगा। टीम को देखते ही चालक ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गया। फरार भी इस तरह हुआ कि पुलिस और प्रशासन उसे खोज तक नहीं सके।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि प्रशासन को "गुप्त सूचना" रोज मिलती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर एक-दो ट्रैक्टर जब्त कर खानापूर्ति कर दी जाती है। असली सरगना और ट्रैक्टर मालिक तक कभी प्रशासन नहीं पहुंच पाता। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब माफिया को छापेमारी की भनक पहले ही लग जाती है, तो आखिर कार्रवाई किस पर हो रही है?
जब्त ट्रैक्टर को बेंगाबाद थाना परिसर में खड़ा कर दिया गया है। अधिकारी अब कागजात खंगालने और मालिक की पहचान करने की बात कर रहे हैं। जबकि गांव वाले जानते हैं कि स्थानीय संरक्षण के बिना नदी से एक भी ट्रैक्टर बालू लेकर नहीं निकल सकता।
परशुरामडीह के ग्रामीणों का कहना है कि नदी से हर दिन दर्जनों ट्रैक्टर अवैध बालू उठाते और ढोते हैं। इससे नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि "जब तक ऊपर से नीचे तक सेटिंग है, तब तक एक ट्रैक्टर पकड़ने से कुछ नहीं होगा। ये सब दिखावा है।
थाना प्रभारी ने कहा कि "अवैध खनन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा"। वहीं अंचल अधिकारी ने ग्रामीणों से सूचना देने की अपील की। लेकिन सवाल बरकरार है - जब प्रशासन देर से पहुंचे और चालक आराम से फरार हो जाए, तो ये अभियान किसके खिलाफ है?
फिलहाल पुलिस वाहन मालिक और चालक की पहचान में जुटी है। अब देखना होगा कि प्रशासन की यह कार्रवाई परशुरामडीह की नदी से अवैध बालू उठाव पर कितने दिन लगाम लगा पाती है।