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चांडिल डैम विस्थापितों को अब तक नहीं मिला पूरा अधिकार, सरकार का जवाब अधूरा: राकेश रंजन महतो

रिपोर्ट: MANISH 8 घंटे पहलेझारखण्ड

परियोजना बंद करने से पहले विस्थापितों का मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार सुनिश्चित करे सरकार: विस्थापित अधिकार मंच

चांडिल डैम विस्थापितों को अब तक नहीं मिला पूरा अधिकार, सरकार का जवाब अधूरा: राकेश रंजन महतो

सरायकेला : चांडिल डैम से प्रभावित हजारों विस्थापित परिवारों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए जवाब को अधूरा बताते हुए कहा कि परियोजना से प्रभावित कई परिवार आज भी अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं। दरअसल झारखंड विधानसभा में सरयू राय द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के जवाब में हफ़िज़ूल हसन, मंत्री जल संसाधन विभाग ने झारखंड जल संसाधन विभाग की ओर से जानकारी दी थी। इस जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए राकेश रंजन महतो ने कहा कि स्वर्णरेखा बहुद्देश्यीय परियोजना के अंतर्गत बने चांडिल डैम से प्रभावित हजारों परिवार आज भी मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अब इस परियोजना को अगले एक से डेढ़ वर्ष के भीतर पूर्ण घोषित कर बंद करने की तैयारी में है। ऐसे में सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परियोजना से प्रभावित सभी परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी विस्थापितों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा दिया गया है? क्या सभी प्रभावित परिवारों को विकास पुस्तिका उपलब्ध कराई गई है जिसके आधार पर उन्हें रोजगार और अन्य सुविधाएं मिलती हैं? राकेश रंजन महतो ने कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी बड़ी परियोजना से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास के लिए भूमि, आवास, रोजगार तथा स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ दिया जाना अनिवार्य होता है। लेकिन जमीनी स्तर पर कई विस्थापित परिवार अब भी इन सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर पुनर्वास भूमि का आवंटन अधूरा है जबकि रोजगार के वादे भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विस्थापितों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले लोगों को कई बार आलोचना और बदनामी का सामना करना पड़ता है लेकिन यह मुद्दा केवल किसी व्यक्ति या संगठन का नहीं बल्कि हजारों प्रभावित परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसलिए अब समय आ गया है कि सभी विस्थापित परिवार, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि आपसी मतभेदों को छोड़कर एकजुट हों। राकेश रंजन महतो ने कहा कि आने वाले एक से डेढ़ वर्ष विस्थापितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि इस दौरान सरकार और विभाग विस्थापितों के सभी लंबित मामलों का समाधान नहीं करते हैं, तो परियोजना को बंद घोषित करना न्यायसंगत नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विस्थापित समाज अपने अधिकारों, न्यायपूर्ण मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि चांडिल डैम से जुड़े सभी लंबित मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर विस्थापित परिवारों को उनका अधिकार दिलाया जाए ताकि विकास परियोजनाओं के साथ सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित हो सके।

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