मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र से 6000 करोड़ रुपये, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये के भुगतान और मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति की मांग
नीति आयोग में झारखंड की आवाज बने हेमंत सोरेन

नई दिल्ली। नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया। उन्होंने जल जीवन मिशन की शेष 6000 करोड़ रुपये की राशि जल्द जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये के भुगतान तथा विभिन्न विकास योजनाओं में केंद्र के सहयोग की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन राज्य के संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने डीएमएफटी के मानकों में संशोधन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत बताई, ताकि विकास परियोजनाओं को गति मिल सके।
श्री सोरेन ने शिक्षा क्षेत्र में विभिन्न केंद्रीय योजनाओं एवं निधियों के एकीकरण पर बल देते हुए राज्य में शैक्षणिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने पीपीपी मोड में प्रस्तावित छह नए मेडिकल कॉलेजों में से शेष दो कॉलेजों को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया।
खेल क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने झारखंड को राष्ट्रीय, एशियाई और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं तथा खेल महाकुंभों की मेजबानी का अवसर देने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डीवीसी, सीसीएल, ईसीएल और अन्य केंद्रीय उपक्रमों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में सामाजिक आधारभूत संरचना के विकास हेतु भूमि संबंधी अनुमति प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाना चाहिए। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखंड को केवल खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और रोजगार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग जरूरी है।