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8 से 15 रुपये किलो में बिक रहा बचपन! तिसरी में ढिबरा चुनने को मजबूर मासूम, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

रिपोर्ट: Amit Sahay6 घंटे पहलेझारखण्ड

बाल श्रम, अवैध माइका कारोबार और सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां, कार्रवाई के बजाय जांच का भरोसा दे रहा प्रशासन

8 से 15 रुपये किलो में बिक रहा बचपन! तिसरी में ढिबरा चुनने को मजबूर मासूम, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

गिरिडीह : जिले के तिसरी प्रखंड में गरीबी, प्रशासनिक उदासीनता और अवैध माइका कारोबार के गठजोड़ ने मासूम बच्चों का बचपन छीन लिया है। लोकाय-नयनपुर थाना क्षेत्र के जमामो तुरीटोला गांव स्थित एक निर्माणाधीन ईंट भट्ठे के समीप दर्जनों नाबालिग बच्चों को माइका स्क्रैप (ढिबरा) चुनते देखा गया। यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है बल्कि बाल श्रम, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और सरकारी राजस्व की चोरी जैसे गंभीर सवाल भी खड़े करता है। स्थानीय बच्चों और मजदूरों के अनुसार अनटेस्टेड ढिबरा 8 रुपये प्रति किलो और टेस्टेड ढिबरा 15 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाता है। आरोप है कि स्थानीय बिचौलिए बच्चों और गरीब मजदूरों से सस्ते दाम पर ढिबरा खरीदकर तिसरी के कथित कारोबारियों के माध्यम से बाहर भेजते हैं जिससे लाखों रुपये का अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। मजबूरी में अभिभावक अपने बच्चों को जान जोखिम में डालकर ढिबरा चुनने भेज रहे हैं। झामुमो प्रखंड अध्यक्ष रिंकू बरनवाल ने भी इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों का अवैध खनन कार्य में शामिल होना चिंताजनक है और प्रशासन को तत्काल सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। तिसरी प्रखंड 20 सूत्री अध्यक्ष मो. मुनिबुद्दीन ने आरोप लगाया कि श्रम विभाग, खनन विभाग और फ्लाइंग स्क्वॉड की निष्क्रियता के कारण अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संयुक्त कार्रवाई नहीं हुई तो मासूम बच्चों का भविष्य लगातार अंधकार में धकेला जाता रहेगा। मामले पर तिसरी के वनपाल अभिमित राज ने बताया कि निर्माणाधीन ईंट भट्ठा लोकाय-नयनपुर निवासी बालेसर मंडल का है। पोकलेन से भूमि समतल करने के दौरान माइका निकल आया था जिसे मजदूर चुन रहे थे। उन्होंने कहा कि वनकर्मियों के पहुंचने से पहले सभी लोग फरार हो गए। वहीं गांवां वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और जांच कराई जाएगी। जिला खान निरीक्षक विश्वनाथ उरांव ने भी जांच के बाद दोषियों और कथित माइका माफियाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मासूम बच्चों से खुलेआम ढिबरा चुनवाया जा रहा था तब संबंधित विभाग और प्रशासन आखिर अब तक मौन क्यों रहा? जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बीच स्थानीय लोगों की मांग है कि दोषियों पर तत्काल कार्रवाई कर बाल श्रम और अवैध माइका कारोबार पर स्थायी रोक लगाई जाए।

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