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हाथी को नहीं बांध सकते बयान पर बढ़ा विवाद, वनपाल ने विधायक से पूछा- बालू माफियाओं पर चुप्पी क्यों?

रिपोर्ट: MANISH 1 घंटे पहलेझारखण्ड

ईचागढ़ में हाथी आतंक, अवैध खनन और विपक्ष की खामोशी पर उठे सवाल, वन विभाग के बयान से सियासत गर्म

हाथी को नहीं बांध सकते बयान पर बढ़ा विवाद, वनपाल ने विधायक से पूछा- बालू माफियाओं पर चुप्पी क्यों?

सरायकेला : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे हाथी-मानव संघर्ष के बीच ईचागढ़ विधायक सविता महतो के हाथी को बांध कर नहीं रखा जा सकता वाले बयान पर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। विधायक के बयान के बाद चांडिल वन क्षेत्र के वनपाल वसिष्ठ नारायण महतो ने खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं जिससे क्षेत्र की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। वनपाल वशिष्ठ नारायण महतो ने कहा कि जब विधायक स्वयं स्वीकार कर रही हैं कि हाथियों को बांधकर नहीं रखा जा सकता तो फिर क्षेत्र में सक्रिय बालू माफियाओं को भी यही बात समझाने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार वन विभाग के कर्मचारी वास्तविक स्थिति बताने की कोशिश करते हैं तो कुछ लोग ग्रामीणों को भड़काकर विभाग को ही निशाना बनाने लगते हैं। वनपाल ने सवाल उठाया कि हाथी समस्या को लेकर अक्सर वन विभाग को घेरा जाता है लेकिन विधायक के इसी बयान पर ग्रामीणों या राजनीतिक दलों की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण का कार्य जनप्रतिनिधियों का होता है जबकि विभाग केवल उन नीतियों को लागू करता है। ऐसे में यदि जनप्रतिनिधि स्वयं हाथियों की स्वाभाविक गतिविधियों को स्वीकार कर रहे हैं तो वन विभाग पर लगातार सवाल उठाना उचित नहीं है। गौरतलब है कि चांडिल, ईचागढ़, कुकड़ू और नीमडीह क्षेत्र में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में कई ग्रामीणों की मौत हुई है, दर्जनों घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। दूसरी ओर स्वर्णरेखा नदी घाटों से अवैध बालू खनन भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। 15 मई को खनन विभाग ने ईचागढ़ क्षेत्र में अवैध बालू परिवहन करते एक ट्रैक्टर जब्त किया था। इधर विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने भी सवाल उठाया कि ईचागढ़ विधानसभा चुनाव में 29 उम्मीदवार मैदान में थे लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद अधिकांश नेता जनता के मुद्दों पर गायब हो गए। उन्होंने कहा कि हाथी-मानव संघर्ष, अवैध खनन और विस्थापन जैसे गंभीर मुद्दों पर विपक्ष की चुप्पी लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। हालांकि वन विभाग के वरीय अधिकारियों ने वनपाल के बयान को उनका व्यक्तिगत मत बताया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वन विभाग का मुख्य कार्य वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है जबकि अवैध खनन पर कार्रवाई खनन विभाग और जिला प्रशासन का दायित्व है।

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