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फर्जी वंशावली से आरक्षण लाभ लेने के आरोपों पर बढ़ा विवाद, मुखिया की जाति जांच पर उठे गंभीर सवाल

रिपोर्ट: Amit Sahay2 घंटे पहलेझारखण्ड

ग्रामसभा की रिपोर्ट पर संदेह, जांच अधिकारी ने दबाव में रिपोर्ट बनाने की बात कही

फर्जी वंशावली से आरक्षण लाभ लेने के आरोपों पर बढ़ा विवाद, मुखिया की जाति जांच पर उठे गंभीर सवाल

बिरनी, गिरिडीह : जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत पड़रिया पंचायत के मुखिया विजय रविदास की जाति प्रमाण-पत्र जांच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। फर्जी वंशावली के आधार पर जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लेने के आरोपों के बीच अब जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने प्रशासनिक जांच की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाया है। जानकारी के अनुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के निर्देश पर 1 जून को पंचायत क्षेत्र के मुरैना गांव में मुखिया विजय रविदास की जातीय स्थिति के सत्यापन के लिए ग्रामसभा आयोजित की गई थी। हालांकि स्थानीय लोगों के विरोध और हंगामे के कारण बैठक स्थगित होने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद जांच प्रतिवेदन में ग्रामसभा को सफल बताते हुए यह उल्लेख किया गया कि उपस्थित लोगों ने सर्वसम्मति से मुखिया को चमार जाति का सदस्य और उसी वंश का बताया। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब ग्रामसभा के अध्यक्ष मथुरा प्रसाद यादव ने दावा किया कि बैठक हंगामे के कारण पूरी नहीं हो सकी थी। उन्होंने कहा कि उनसे केवल हस्ताक्षर लिए गए थे लेकिन बाद में उनके हस्ताक्षर के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर ग्रामसभा को मान्य दिखा दिया गया। उनके अनुसार यदि ऐसा हुआ है तो यह ग्रामीणों और ग्रामसभा दोनों के साथ विश्वासघात है। इधर जांच से जुड़े पदाधिकारी सुरेंद्र यादव ने भी कथित रूप से स्वीकार किया कि रिपोर्ट तैयार करने के दौरान वे दबाव में थे। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के दबाव में बैठक को मान्य दर्शाते हुए रिपोर्ट भेजी गई जिसे वे अपनी गलती मानते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने बीडीओ फणीश्वर रजवार, अंचलाधिकारी संदीप मद्धेशिया तथा ग्रामसभा अध्यक्ष की उपस्थिति में भी अपनी त्रुटि स्वीकार की। वहीं शिकायतकर्ता दामोदर दास सहित अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि मुखिया ने फर्जी वंशावली के आधार पर जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया है। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। आवेदक दिलीप रविदास, मुकेश रविदास, शिव कुमार दास, रोहित दास, अशोक दास एवं प्रदीप दास ने आरोप लगाया कि मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिकायत करने पर अलग-अलग विभागों के बीच उन्हें भेजा जा रहा है जिससे जांच प्रक्रिया पर संदेह और गहरा गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से अब तक कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरक्षण और जाति प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो इससे सरकारी व्यवस्था पर लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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