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खालसा सृजना दिहाड़े पर साकची गुरुद्वारा में उमड़ी श्रद्धा, विकास कार्यों के लिए निशान सिंह सम्मानित

रिपोर्ट: VBN News Desk7 घंटे पहलेझारखण्ड

अमृत पीवो सदा चिर जीवो से गूंजा दरबार, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया कीर्तन और लंगर का आनंद

खालसा सृजना दिहाड़े पर साकची गुरुद्वारा में उमड़ी श्रद्धा, विकास कार्यों के लिए निशान सिंह सम्मानित

जमशेदपुर : साकची गुरुद्वारा साहिब में खालसा सृजन दिवस (बैसाखी) के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर विशेष कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया जिसमें अमृत पीवो सदा चिर जीवो गुरुबाणी की मधुर स्वर लहरियों से पूरा दरबार साहिब गूंज उठा। इस दिव्य वातावरण में संगत भाव-विभोर होकर आध्यात्मिक अनुभूति में लीन हो गई। कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी साकची के प्रधान निशान सिंह को उनके द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों के लिए संगत द्वारा सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान संगत के विश्वास और सहयोग का प्रतीक बना। बैसाखी दीवान के दौरान कमिटी के महासचिव परमजीत सिंह काले ने पिछले एक वर्ष के आय-व्यय का लेखा-जोखा संगत के समक्ष प्रस्तुत किया और आगामी विकास योजनाओं की जानकारी दी। संगत ने बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारों के साथ इन योजनाओं को अपनी स्वीकृति दी। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब की समाप्ति के साथ हुई। सिख स्त्री सत्संग सभा, सुखमनी साहिब कीर्तनी जत्था, बीबी रविंदर कौर तथा मुख्य ग्रंथी भाई अमृतपाल सिंह मन्नन सहित विभिन्न रागी जत्थों ने क्रमबद्ध रूप से कीर्तन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर किया। हजूरी रागी जत्था द्वारा प्रस्तुत कीर्तन ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। अपने संबोधन में निशान सिंह ने कहा कि खालसा सृजन दिवस सिख इतिहास का गौरवशाली पर्व है, जो हमें सेवा, समर्पण और साहस का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर लगभग पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा पहुंचकर माथा टेका और गुरु की कृपा प्राप्त की। वहीं महासचिव परमजीत सिंह काले ने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को भी मजबूत करता है। कार्यक्रम के समापन पर अरदास के बाद गुरु का अटूट लंगर श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया। आयोजन में सिख स्त्री सत्संग सभा, सिख नौजवान सभा एवं अन्य संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही जिससे पूरा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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