डायन प्रथा खत्म करने को भक्ति और जागरूकता जरूरी : आनंद मार्ग प्रचारक संघ
तंत्र-मंत्र के नाम पर महिलाओं का शोषण बंद हो, शिक्षा और वैज्ञानिक सोच पर जोर

सरायकेला : आनंदमार्ग प्रचारक संघ की ओर से जिले के विभिन्न क्षेत्रों (आदित्यपुर गम्हरिया, कांड्रा, राजनगर, सिनि और सरायकेला) में डायन प्रथा व बलि प्रथा के खिलाफ व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। संगठन के प्रतिनिधि सुनील आनंद ने कहा कि झारखंड में तंत्र-मंत्र के नाम पर महिलाओं का सबसे अधिक शोषण होता है और लगभग हर महीने किसी न किसी जिले में डायन बताकर हत्या की घटना सामने आती है। उन्होंने कहा कि मंत्र का उद्देश्य मानव का आध्यात्मिक और मानसिक उत्थान है, न कि किसी को नुकसान पहुंचाना। तंत्र का वास्तविक अर्थ आत्मोद्धार और मुक्ति का मार्ग है लेकिन अंधविश्वास के कारण इसे गलत रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को तंत्र-मंत्र से हानि पहुंचाने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। संगठन ने बलि प्रथा, ओझा-गुनी और झाड़-फूंक जैसी कुप्रथाओं को समाज के लिए घातक बताते हुए शिक्षा प्रणाली में वैज्ञानिक, व्यावहारिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण शामिल करने की मांग की। उन्होंने लोगों से अपील की कि बीमारी या सांप-बिच्छू के काटने जैसी स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं। सुनील आनंद ने कहा कि भक्ति, कीर्तन और आत्मबल से ही मनुष्य अंधविश्वास से ऊपर उठ सकता है। मजबूत मन और जागरूक समाज ही डायन प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त कर सकता है।