सरकारी जमीन पर वॉटरमार्क प्रोजेक्ट! 1.92 एकड़ में अवैध अतिक्रमण की पुष्टि
नगर निगम ने उपायुक्त को भेजी रिपोर्ट, नियम उल्लंघन पर बिल्डर पर कार्रवाई तय?

गम्हरिया : प्रखंड के आनंदपुर मौजा में निर्माणाधीन वॉटरमार्क प्रोजेक्ट अब गंभीर विवादों में घिर गया है। करीब दो वर्षों बाद प्रशासनिक हलचल तेज हुई है और जांच में सरकारी अनाबाद बिहार सरकार की जमीन, बांध एवं सर्वसाधारण भूमि पर अवैध अतिक्रमण की पुष्टि हुई है। आदित्यपुर नगर निगम ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपते हुए अग्रेतर कार्रवाई की अनुशंसा की है। मामले का खुलासा लगभग दो वर्ष पूर्व हुआ था जब तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी पारुल सिंह ने जांच में पाया था कि आनंदपुर मौजा में करीब 1.92.82 एकड़ सरकारी नाबाद भूमि पर निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने संबंधित डेवलपर को सभी वैध दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया था। हालांकि उनके तबादले के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया और इस बीच निर्माण कार्य जारी रहा। हालिया जांच में थाना नंबर 62, खाता संख्या 105, प्लॉट संख्या 63, 27, 28 और 29 पर अवैध निर्माण की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार प्लॉट संख्या 63 में प्रवेश द्वार व गार्ड रूम, 28 और 29 में कार्यालय तथा 27 में पहुंच पथ का निर्माण सरकारी भूमि पर किया गया है। नगर निगम सूत्रों के अनुसार यह मामला झारखंड नगरपालिका अधिनियम, भूमि राजस्व संहिता तथा भवन निर्माण उपविधियों के उल्लंघन से जुड़ा हो सकता है। यदि नक्शा विचलन या गलत नक्शा स्वीकृत कराने की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत निर्माण रद्द, भारी जुर्माना और अवैध हिस्से को ध्वस्त करने की कार्रवाई संभव है। इसके अलावा श्रम कानूनों के तहत लेबर सेस जमा किए बिना प्लीन्थ निर्माण कराने का आरोप भी गंभीर है जो भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियमन) अधिनियम का उल्लंघन माना जा सकता है। वहीं स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बहुमंजिला प्रोजेक्ट खड़ा करना न केवल कानून की अवहेलना है बल्कि सार्वजनिक हित के साथ भी खिलवाड़ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। अब सबकी नजर उपायुक्त के निर्णय पर टिकी है। नियमों के अनुसार दोष सिद्ध होने पर अवैध अतिक्रमण हटाने, निर्माण सील करने और आर्थिक दंड लगाने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि क्या प्रभावशाली बिल्डरों पर भी कानून का समान रूप से पालन कराया जाएगा या यह मामला भी फाइलों में सिमट कर रह जाएगा।