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प्रकृति का संरक्षण ही धर्म सिखाता है, करमा पर्व प्रकृति, संस्कृति और एकता का प्रतीक : बैद्यनाथ राम

रिपोर्ट: Santosh Kumar4 घंटे पहलेझारखण्ड

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने करमा गीत, पारंपरिक नृत्य एवं झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।

प्रकृति का संरक्षण ही धर्म सिखाता है, करमा पर्व प्रकृति, संस्कृति और एकता का प्रतीक : बैद्यनाथ राम

लातेहार। करमा पर्व की पूर्व संध्या पर उत्क्रमित +2 उच्च विद्यालय जलता परसही में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम शामिल हुए। विद्यालय परिवार की ओर से सांसद का पारंपरिक तरीके से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने करमा गीत, पारंपरिक नृत्य एवं झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया और कार्यक्रम स्थल मांदर की थाप से गूंज उठा।अपने संबोधन में सांसद बैद्यनाथ राम ने कहा कि करमा पर्व झारखंड की प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण का संदेश देता है और अपनी समृद्ध परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए लोक संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया। मौके पर विद्यालय के प्राचार्य आशीष पाण्डेय, सुदामा प्रसाद, दीपक कुमार समेत शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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