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छोटा गम्हरिया में नाले के अतिक्रमण से खेती पर संकट, प्रशासनिक निरीक्षण के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

रिपोर्ट: MANISH 17 घंटे पहलेझारखण्ड

उद्योगों के बीच खेतों का अस्तित्व खतरे में, अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी जलनिकासी की समस्या जस की तस

छोटा गम्हरिया में नाले के अतिक्रमण से खेती पर संकट, प्रशासनिक निरीक्षण के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

सरायकेला-खरसावां : जिले में औद्योगिक विकास के साथ खेती और प्राकृतिक जलनिकासी व्यवस्था को बचाने की प्रशासनिक नीति पर छोटा गम्हरिया की स्थिति सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टाटा स्टील गम्हरिया के आसपास संचालित कई कंपनियों द्वारा खेतों के समीप से गुजरने वाले नाले के हिस्से का कथित अतिक्रमण कर उसे काफी संकरा कर दिया गया है। इसका असर अब खेती और आवासीय क्षेत्रों दोनों पर दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इकोजोन कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड, फ्रेंड एसोसिएट, गुप्ता फॉउंड्री और क्रॉस कंपनी द्वारा नाले के हिस्से में निर्माण किए जाने की शिकायत है। आरोप है कि नाले का प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र कम होने से बारिश अथवा अधिक पानी आने की स्थिति में निकासी बाधित हो जाती है। कहीं पानी खेतों में पहुंच रहा है तो कहीं आवासीय इलाके की सड़कों पर बह रहा है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ कंपनियों में आने-जाने वाले कामगारों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायतें नई नहीं हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मामले की पूर्व में कई बार शिकायत की गई। इसके बाद तत्कालीन प्रभारी एसडीओ निवेदिता नियति, तत्कालीन अंचल अधिकारी अरविंद बेदीया तथा वर्तमान अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार ने भी स्थल निरीक्षण किया। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि नाले की स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ और समस्या लगातार बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन के सामने अब सवाल यह है कि बार-बार निरीक्षण के बाद भी नाले की सीमांकन, पैमाइश, भूमि की प्रकृति और कथित निर्माणों की वैधता की स्पष्ट जांच क्यों नहीं हुई? यदि जांच में अतिक्रमण अथवा नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो नियमानुसार कार्रवाई कर नाले का मूल प्रवाह बहाल कराया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था और खेती योग्य भूमि को जलजमाव से बचाने की मांग की है।

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