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गरामथान की सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण, पीएम आवास व बकरी शेड पर चला बुलडोजर

रिपोर्ट: MANISH 7 घंटे पहलेझारखण्ड

ग्रामीणों ने उठाए सवाल- सरकारी भूमि पर कैसे स्वीकृत हुआ पीएम आवास? बीडीओ व आवास कॉर्डिनेटर की भूमिका की जांच की मांग

गरामथान की सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण, पीएम आवास व बकरी शेड पर चला बुलडोजर

सरायकेला-खरसावां : जिले के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत परगामा पंचायत में गरामस्थान (पूजा स्थल) की सरकारी भूमि पर वर्षों से किए गए अतिक्रमण को प्रशासन ने सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ध्वस्त कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई का ग्रामीणों ने स्वागत किया, वहीं इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और आवास कॉर्डिनेटर की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार मौजा परगामा, थाना संख्या-86, खाता संख्या-230, प्लॉट संख्या-470 की लगभग 17 डिसमिल गरामस्थान की सरकारी भूमि पर बूढ़ी महतो एवं प्रल्हाद महतो द्वारा बकरी शेड तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों की शिकायत पर राजस्व विभाग ने जांच की। अंचल, अनुमंडल एवं जिला स्तर पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया। इसके बाद प्रभारी अंचलाधिकारी अभय कुमार द्विवेदी के नेतृत्व में जेसीबी लगाकर अवैध निर्माण को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान अंचल निरीक्षक कुणाल कुमार शर्मा दंडाधिकारी के रूप में तैनात रहे जबकि विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नीमडीह थाना पुलिस मौके पर मौजूद रही। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। हालांकि प्रशासन की कार्रवाई के साथ ही ग्रामीणों ने कई गंभीर प्रश्न भी उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि संबंधित भूमि सरकारी गरामस्थान के रूप में दर्ज थी तो उस पर प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति कैसे दी गई? ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना स्थल सत्यापन के लाभुक का चयन किया गया जिससे सरकारी भूमि पर निर्माण संभव हो सका। उन्होंने इस पूरे मामले में तत्कालीन एवं वर्तमान बीडीओ तथा आवास कॉर्डिनेटर की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार लाभुक को अपनी वैध एवं विवादमुक्त भूमि पर ही आवास निर्माण की स्वीकृति दी जा सकती है। ऐसे में सरकारी भूमि पर योजना का लाभ मिलना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला प्रतीत होता है। ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। प्रभारी सीओ अभय कुमार द्विवेदी ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा। वहीं ग्रामीण अब इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग कर रहे हैं।

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