वार्ड 17 में नीतू शर्मा के पक्ष में बनते समीकरण, प्रोफेशनल वर्ग का झुकाव निर्णायक?
महिला मतदाताओं और उच्च मध्यमवर्ग का बढ़ा समर्थन, 23 फरवरी से पहले चुनावी तस्वीर साफ

आदित्यपुर : नगर निगम का सबसे अधिक मतदाताओं वाला वार्ड 17 इस बार बेहद दिलचस्प और बहुस्तरीय मुकाबले का केंद्र बना हुआ है। 23 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले, प्रचार थमने में अब 72 घंटे से भी कम समय बचा है और चुनावी समीकरण तेजी से स्पष्ट होते नजर आ रहे हैं। करीब छह हजार से अधिक मतदाताओं वाले इस वार्ड की सामाजिक संरचना इसे अन्य वार्डों से अलग बनाती है। लगभग 50 प्रतिशत मतदाता महिलाएं हैं जबकि करीब 70 प्रतिशत मतदाता उच्च मध्यमवर्ग और प्रोफेशनल वर्ग से जुड़े हैं जिनमें डॉक्टर, इंजीनियर, ब्यूरोक्रेट्स, डेवलपर्स और बिल्डर्स शामिल हैं। यह वर्ग भावनात्मक नारों से अधिक प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और शांत वातावरण को प्राथमिकता देता है। ऐसे में निवर्तमान पार्षद नीतू शर्मा की स्थिति मजबूत होती दिख रही है। वार्ड की एकमात्र महिला प्रत्याशी के रूप में उन्हें अनुभव और संतुलित कार्यशैली का लाभ मिलता नजर आ रहा है। उनके पिछले कार्यकाल को लेकर मतदाताओं के बीच सकारात्मक चर्चा है और कई जानकार मानते हैं कि तुलनात्मक मूल्यांकन इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उच्च शिक्षित और प्रोफेशनल वर्ग के बीच यह धारणा उभर रही है कि वार्ड की शांति और सुव्यवस्थित प्रशासन के लिए अनुभवी नेतृत्व आवश्यक है। अनौपचारिक रूप से नीतू है तो मुमकिन है जैसे संदेश भी चर्चा में हैं हालांकि मतदाता सार्वजनिक रूप से खुलकर बयान देने से बच रहे हैं। वार्ड में लगभग 20 प्रतिशत मध्यमवर्गीय मतदाता हैं जिन पर जातीय समीकरणों का प्रभाव संभव है जबकि करीब 10 प्रतिशत मतदाता स्लम बस्ती क्षेत्र से आते हैं। फिर भी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्णायक भूमिका उच्च मध्यमवर्ग और महिला मतदाता निभा सकते हैं। बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और महिला प्रतिनिधित्व की भावना नीतू शर्मा को मनोवैज्ञानिक बढ़त देती दिख रही है। मतदान से पहले के अंतिम दिनों में यही समीकरण वार्ड 17 के चुनाव परिणाम की दिशा तय कर सकते हैं।