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नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में गोपनीय प्रिंटिंग भुगतान में वित्तीय अनियमितता! स्पेशल ऑडिट में 2.14 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान का खुलासा

रिपोर्ट: VBN News Desk23 घंटे पहलेझारखण्ड

पुराने एग्रीमेंट की जगह बढ़ी दरों पर हुआ भुगतान, ऑडिट रिपोर्ट के बाद वसूली और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के निर्देश

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में गोपनीय प्रिंटिंग भुगतान में वित्तीय अनियमितता! स्पेशल ऑडिट में 2.14 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान का खुलासा

मेदिनीनगर, पलामू : नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में गोपनीय मुद्रण कार्य के भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। विशेष अंकेक्षण (स्पेशल ऑडिट) की जांच रिपोर्ट में तय दरों से अधिक भुगतान किए जाने की बात सामने आने के बाद 2 लाख 14 हजार 784 रुपये की वसूली करने तथा मामले में दोषी अथवा उत्तरदायी अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन और कोयल एजेंसी (जानकी ईमेल प्रा० लि०) के बीच 6 फरवरी 2023 को गोपनीय मुद्रण कार्य के लिए इकरारनामा हुआ था। यह समझौता तीन वर्षों के लिए वैध था जिसमें विभिन्न मुद्रण कार्यों की दरें पहले से निर्धारित की गई थीं। विशेष अंकेक्षण में सत्र 2022-26 की तृतीय सेमेस्टर परीक्षा-2025 के कुछ विषयों के प्रश्नपत्रों की छपाई से संबंधित भुगतान की जांच की गई। जांच में पाया गया कि इस कार्य के लिए 9 अप्रैल 2025 को कार्यादेश जारी किया गया था, जबकि बाद में 14 जून 2025 से लागू नई एवं बढ़ी हुई दरों के आधार पर भुगतान कर दिया गया। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कार्यादेश जारी होने की तिथि को देखते हुए भुगतान फरवरी 2023 के मूल इकरारनामे में निर्धारित दरों के आधार पर किया जाना चाहिए था। बढ़ी हुई दरों पर भुगतान किए जाने के कारण विश्वविद्यालय कोष को ₹2,14,784 का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। अंकेक्षण निदेशालय ने इसे वित्तीय विसंगति मानते हुए अतिरिक्त भुगतान की गई राशि संबंधित दोषी अथवा उत्तरदायी व्यक्ति से वसूल करने का निर्देश दिया है। साथ ही वसूली की राशि विश्वविद्यालय के उचित खाते में जमा कर कार्रवाई प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस मामले को लेकर छात्र संगठनों और नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आपसू नेता राहुल दुबे ने आरोप लगाया कि सत्र में देरी, परीक्षा परिणाम और प्रमाणपत्र वितरण में सुस्ती के बावजूद भुगतान के मामलों में नियमों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कुलपति और परीक्षा विभाग की भूमिका की जांच की मांग करते हुए संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की। वहीं एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमरनाथ तिवारी ने कहा कि विगत दो वर्षों में विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों पर अंकेक्षण रिपोर्ट सामने आने के बावजूद उच्च स्तर पर कार्रवाई नहीं होना सवाल खड़े करता है। आपसू नेता कमलेश कुमार पाण्डेय ने मामले में सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने, उन्हें पदमुक्त करने तथा पिछले दो वर्षों में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीआईडी जांच कराने की मांग की है। हालांकि मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन अथवा संबंधित एजेंसी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने आना शेष है।

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