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पलामू में रहस्यमयी बीमारी से 10 दिनों में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज की

रिपोर्ट: Ashwini kumar Ghai4 घंटे पहलेझारखण्ड

रिम्स में इलाज के दौरान पांचवीं मौत, राख और सरसों के तेल के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे, विशेषज्ञों की टीम कारण तलाशने में जुटी

पलामू में रहस्यमयी बीमारी से 10 दिनों में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज की

पलामू: झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में रहस्यमयी बीमारी से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार तड़के Rajendra Institute of Medical Sciences (रिम्स) में इलाज के दौरान नकुल महतो की मौत हो गई। इसके साथ ही पिछले 10 दिनों में परिवार के पांच सदस्यों की जान जा चुकी है, जबकि अन्य सदस्य अब भी रिम्स में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

मृतकों में 19 जून को कुलदीप महतो, 20 जून को उनकी बेटी बबीता कुमारी, 26 जून को दूसरी बेटी इंदु कुमारी, 28 जून को बहू श्वेता कुमारी और 29 जून को बेटे नकुल महतो की मौत हुई। श्वेता और नकुल ने रिम्स में इलाज के दौरान दम तोड़ा। परिवार की लाखो देवी, एक बेटा और एक पोता अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार ने बीमार होने के बाद लंबे समय तक चिकित्सकीय उपचार के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया। अधिकारियों के अनुसार, कुलदीप महतो और उनकी बेटी की मौत के बाद भी परिवार लेस्लीगंज के पूर्णाडीह क्षेत्र में झाड़-फूंक कराता रहा। जांच के दौरान यह भी पता चला कि परिवार के सदस्य लंबे समय से किसी प्रकार की राख का सेवन कर रहे थे।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिक्का गांव और पूर्णाडीह से राख के नमूने एकत्र किए हैं। साथ ही परिवार के खान-पान, पेयजल और अन्य संभावित कारणों की भी विस्तृत जांच की जा रही है।

जिले के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने परिवार को चार बार इलाज के लिए रेस्क्यू किया था, लेकिन वे बार-बार झाड़-फूंक का सहारा लेते रहे। उन्होंने कहा कि राख के नमूनों की जांच कराई जाएगी और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

पाटन के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार ने बताया कि पांचवीं मौत के बाद जांच और तेज कर दी गई है। विशेषज्ञों की टीम गांव पहुंचकर लोगों के खान-पान, रहन-सहन और अन्य संभावित कारणों की जानकारी जुटा रही है।

इस बीच Medinirai Medical College and Hospital के डॉ. आर.के. रंजन ने बताया कि मृतकों के पोस्टमार्टम के दौरान विसरा सुरक्षित रखा गया है, जिसे पुलिस फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) जांच के लिए भेजेगी। उन्होंने आशंका जताई कि मामला ड्रॉप्सी बीमारी से भी जुड़ा हो सकता है। साथ ही परिवार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सरसों के तेल की जांच की भी आवश्यकता बताई, क्योंकि दूषित तेल भी इस तरह के लक्षणों का कारण बन सकता है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और चिकित्सा विशेषज्ञों की संयुक्त टीम मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन मौतों के पीछे बीमारी, जहरीले पदार्थ, दूषित खाद्य सामग्री या कोई अन्य कारण जिम्मेदार है।

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