संचार, व्यक्तित्व विकास और इंटरव्यू तैयारी पर फोकस, विशेषज्ञों ने दिए व्यावहारिक प्रशिक्षण
तीन दिन में निखरे करियर स्किल्स: योगदा सत्संग महाविद्यालय की कार्यशाला में 110+ विद्यार्थियों ने सीखे सफलता के गुर

रांची। योगदा सत्संग महाविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय ‘व्यापक व्यवहार कौशल’ कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। इस कार्यशाला में 110 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में सफलता के लिए आवश्यक व्यवहारिक कौशलों से सुसज्जित करना था।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, समूह चर्चा, प्रस्तुतीकरण कौशल और साक्षात्कार की तैयारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। विद्यार्थियों को न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी गई, बल्कि विभिन्न गतिविधियों, रोल-प्ले और इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी कराया गया। इससे प्रतिभागियों में आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना सीखा।
कार्यक्रम का उद्देश्य शैक्षणिक ज्ञान और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटना था, ताकि विद्यार्थी भविष्य में रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल अकादमिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवहारिक कौशल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
कार्यशाला का समापन एक औपचारिक समारोह के साथ हुआ, जिसमें आयोजन समिति, प्राध्यापकगण और प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। प्लेसमेंट सेल प्रभारी डॉ. रविन्द्र कुमार ने अपने समापन संबोधन में कहा कि व्यवहार कौशल केवल पेशेवर जीवन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि दैनिक जीवन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रभावी संचार, सहानुभूति, टीमवर्क और अनुकूलनशीलता जैसे गुण आधुनिक जीवन की जटिलताओं को समझने और सफल करियर बनाने में सहायक होते हैं।
डॉ. रविन्द्र कुमार ने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से श्री प्रवीण शर्मा का धन्यवाद किया, जिन्होंने अपने ज्ञानवर्धक और संवादात्मक तकनीकी सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान किया।
आयोजन टीम की समन्वयक डॉ. मयूरी, सुश्री सिमरन कौर, डॉ. लवनीश और डॉ. दिवाकर को भी योजना निर्माण, समन्वय और व्यवस्थापन में उनके निरंतर प्रयासों के लिए सराहा गया। उनके सहयोग से यह कार्यशाला सुचारू रूप से संचालित हो सकी।
कार्यशाला के अंतिम दिन विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे अब साक्षात्कार एवं पेशेवर परिस्थितियों का सामना करने के लिए अधिक तैयार महसूस कर रहे हैं। कई प्रतिभागियों ने इसे अपने करियर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई इस कार्यशाला ने न केवल विद्यार्थियों के कौशल विकास में योगदान दिया, बल्कि उन्हें अपने लक्ष्यों के प्रति और अधिक जागरूक भी बनाया। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और प्लेसमेंट सेल के संयुक्त प्रयासों ने एक बार फिर यह साबित किया कि संस्थान विद्यार्थियों के रोजगार कौशल, व्यक्तित्व विकास और समग्र उन्नति के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।