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"डिलीवरी चार्ज पूरा, सुविधा जीरो!"

रिपोर्ट: VBN News Desk2 घंटे पहलेझारखण्ड

गैस लेने उपभोक्ता खुद पहुंच रहे गोदाम, चौपारण की एचपी गैस एजेंसी पर उठे बड़े सवाल

"डिलीवरी चार्ज पूरा, सुविधा जीरो!"

Manish Sinha

हजारों ग्राहकों से वसूला जा रहा होम डिलीवरी शुल्क, फिर भी नहीं पहुंच रहा सिलेंडर घर, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

चौपारण (हजारीबाग)। रसोई गैस उपभोक्ताओं से होम डिलीवरी का शुल्क वसूला जा रहा है, लेकिन गैस सिलेंडर घर तक नहीं पहुंच रहा। चौपारण की देविशिका एचपी गैस एजेंसी को लेकर उपभोक्ताओं में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों का आरोप है कि एजेंसी बिल में डिलीवरी चार्ज जोड़कर राशि तो ले रही है, लेकिन उपभोक्ताओं को खुद गोदाम पहुंचकर सिलेंडर ढोने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

क्षेत्र में यह मामला अब उपभोक्ता सुविधा से आगे बढ़कर अधिकारों के हनन का मुद्दा बनता जा रहा है। ग्रामीण इलाकों से लेकर बाजार क्षेत्र तक उपभोक्ताओं के बीच एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है—"जब डिलीवरी का पैसा लिया जा रहा है तो गैस घर तक क्यों नहीं पहुंच रही?"

गोदाम तक जाने को मजबूर ग्राहक

उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस बुकिंग के बाद एजेंसी की ओर से उन्हें कार्यालय से पर्ची लेने और फिर गोदाम जाकर सिलेंडर उठाने को कहा जाता है। ऐसे में लोगों को अलग से वाहन किराया खर्च करना पड़ रहा है। कई बुजुर्ग और महिलाएं परिजनों के सहारे सिलेंडर लाने को विवश हैं। गर्मी के इस मौसम में स्थिति और भी विकट हो गई है। उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार लू और धूप से बचाव के निर्देश जारी कर रही है, दूसरी तरफ गैस उपभोक्ता खुले आसमान के नीचे सिलेंडर के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं।

"सेवा नहीं तो शुल्क क्यों?"

सामाजिक कार्यकर्ता एवं उपभोक्ता शेखर गुप्ता ने सवाल उठाया है कि जब उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी नहीं मिल रही है तो डिलीवरी शुल्क लेने का औचित्य क्या है? उन्होंने कहा कि यह केवल सुविधा का मामला नहीं बल्कि उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि अनुमंडल की कई अन्य गैस एजेंसियां अपने उपभोक्ताओं को नियमित रूप से घर तक सिलेंडर पहुंचा रही हैं, जबकि चौपारण के उपभोक्ता इस मूलभूत सुविधा से वंचित हैं।

स्टाफ का जवाब बना चर्चा का विषय

मामले को लेकर एजेंसी संचालक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी। वहीं एजेंसी के कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से कार्यालय और गोदाम से ही सिलेंडर लेने की बात कही। इसके बाद लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।

सरकारी नियमों पर भी उठे सवाल

केंद्र सरकार द्वारा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरों को गैस बुकिंग के सात दिनों के भीतर डिलीवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि उपभोक्ता स्वयं सिलेंडर लेने को मजबूर हैं तो यह व्यवस्था कई सवाल खड़े कर रही है। जानकार बताते हैं कि यदि उपभोक्ता खुद गोदाम से सिलेंडर लेते हैं तो उन्हें निर्धारित नियमों के तहत रिबेट (छूट) मिलने का भी प्रावधान है। अधिकांश उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी तक नहीं है।

डीएसओ ने दिए कार्रवाई के संकेत

जिला आपूर्ति पदाधिकारी मुरली यादव ने स्वीकार किया कि इस प्रकार की शिकायतें पहले भी मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यदि उपभोक्ताओं से डिलीवरी शुल्क लिया जा रहा है तो उन्हें घर तक गैस पहुंचाना एजेंसी की जिम्मेदारी है। मामले की जांच कर एजेंसी और गैस कंपनी से बात की जाएगी। निर्देशों का पालन नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

अब जनता पूछ रही है—हक कब मिलेगा?

चौपारण के हजारों गैस उपभोक्ताओं की निगाहें अब प्रशासन और गैस कंपनी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल सीधा है—जब बिल में डिलीवरी का पैसा शामिल है, तो आखिर उपभोक्ताओं को उनका हक कब मिलेगा? गैस एजेंसी की व्यवस्था पर उठे ये सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गए हैं।

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