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जीपीएस फोटो ने खोली सच्चाई, ईचागढ़ थाना प्रभारी पर लगाए गए आरोप निकले भ्रामक

रिपोर्ट: MANISH 12 घंटे पहलेझारखण्ड

अवैध बालू के खिलाफ लगातार कार्रवाई से बौखलाए तत्व फैला रहे अफवाह, पुलिस ने तथ्यों के साथ दिया जवाब

जीपीएस फोटो ने खोली सच्चाई, ईचागढ़ थाना प्रभारी पर लगाए गए आरोप निकले भ्रामक

चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ थाना क्षेत्र में जप्त अवैध बालू को लेकर प्रकाशित खबरों के बाद अब पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। थाना प्रभारी बजरंग महतो के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को पुलिस ने तथ्यों और जीपीएस कैमरा से ली गई तस्वीरों के माध्यम से खारिज करते हुए इसे पुलिस की छवि धूमिल करने की साजिश बताया है। दरअसल कुछ समाचार माध्यमों में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी कि पुरानडीह उत्क्रमित विद्यालय परिसर के समीप अंचल प्रशासन द्वारा जप्त लगभग 8 हजार सीएफटी अवैध बालू थाना की निगरानी में रहने के बावजूद रातों-रात गायब हो गया। खबर में पुलिस और बालू कारोबारियों की कथित मिलीभगत तक के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इधर ईचागढ़ पुलिस ने पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि जप्त बालू सुरक्षित है और किसी प्रकार की चोरी या गायब होने की घटना नहीं हुई है। पुलिस द्वारा जारी जीपीएस कैमरा फोटो में संबंधित स्थल पर बालू का भंडारण स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया जिससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। थाना प्रभारी बजरंग महतो ने कहा कि ईचागढ़ थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन एवं परिवहन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। हाल के दिनों में कई कार्रवाई होने से अवैध कारोबार से जुड़े लोगों में बेचैनी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इसी कारण पुलिस की साख को नुकसान पहुंचाने और कार्रवाई को कमजोर करने के उद्देश्य से भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जप्त बालू को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा गया है तथा पूरे मामले का रिकॉर्ड उपलब्ध है। जीपीएस कैमरा से ली गई तस्वीरें और स्थल निरीक्षण इस बात का प्रमाण हैं कि बालू गायब होने की बात पूरी तरह निराधार है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जिस स्थान पर बालू रखा गया था वहां ट्रैक्टरों के निशान होना स्वाभाविक है क्योंकि पूर्व में जप्ती और प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान भारी वाहनों का आना-जाना हुआ था। केवल टायर के निशान के आधार पर बालू चोरी का दावा करना उचित नहीं माना जा सकता। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि बिना किसी आधिकारिक जांच या पुष्टि के पुलिस पर गंभीर आरोप लगाना गलत परंपरा को बढ़ावा देता है। कई ग्रामीणों ने कहा कि थाना प्रभारी बजरंग महतो के कार्यकाल में क्षेत्र में अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार कार्रवाई हुई है जिससे कई अवैध सिंडिकेट प्रभावित हुए हैं। थाना प्रभारी का कहना है कि 8 हजार सीएफटी बालू कोई छोटी मात्रा नहीं होती जिसे दो-चार लोग चुपचाप बोरे में भरकर ले जाएं। इतनी बड़ी मात्रा में बालू हटाने या दोबारा डंप करने के लिए कई ट्रैक्टर, हाईवा या बड़े वाहनों की जरूरत पड़ती। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सचमुच बालू हटाया गया था तो क्या किसी ग्रामीण, राहगीर या स्थानीय व्यक्ति ने रातभर चलने वाले भारी वाहनों को आते-जाते देखा था? बजरंग महतो के अनुसार यदि इतने बड़े पैमाने पर बालू का उठाव हुआ होता तो वाहन की आवाज, आवाजाही और गतिविधियां निश्चित रूप से लोगों की नजर में आतीं। फिर आखिर किसी ने भी तत्काल इसकी सूचना थाना, अंचल कार्यालय या प्रशासन को क्यों नहीं दी? केवल अगले दिन टायर के निशान देखकर बड़े स्तर की चोरी का दावा कर देना जल्दबाजी भरा निष्कर्ष लग रहा है। इसी तरह 20 मई को उसी स्थान पर फिर से बालू भरा होने की जीपीएस फोटो सामने आने के बाद भी सवाल और गहरे हो गए हैं। यदि वास्तव में बालू गायब हुआ था और बाद में दोबारा डाला गया तो आखिर वह बालू किस वाहन से लाया गया? कितने ट्रैक्टर या हाईवा लगे? क्या किसी ने उन वाहनों का नंबर देखा? क्या किसी ग्रामीण ने वीडियो बनाया या प्रशासन को इसकी लिखित सूचना दी? अब तक इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। इन परिस्थितियों में कई स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता यह मान रहे हैं कि बिना ठोस प्रमाण के थाना प्रभारी बजरंग महतो पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि मामले की तकनीकी और प्रशासनिक जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। इधर पुलिस विभाग के अधिकारियों ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अवैध खनन और बालू कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही अफवाह फैलाने वालों और प्रशासनिक कार्य में बाधा उत्पन्न करने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें। ईचागढ़ थाना ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना और अवैध कारोबार पर कार्रवाई करना पुलिस की प्राथमिकता है तथा किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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