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यूपीआई पर फैसला नहीं बदला तो पलामू से दिल्ली कूच कर मोदी के आवास का करेंगे घेराव : त्रिपाठी

रिपोर्ट: VBN News Desk1 दिन पहलेझारखण्ड

पूर्व मंत्री ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा- आम लोगों की गाढ़ी कमाई पर अतिरिक्त बोझ बर्दाश्त नहीं

यूपीआई पर फैसला नहीं बदला तो पलामू से दिल्ली कूच कर मोदी के आवास का करेंगे घेराव : त्रिपाठी

मेदिनीनगर (पलामू) : यूपीआई से जुड़े केंद्र सरकार के फैसले में बदलाव नहीं किया गया तो हजारों कार्यकर्ताओं के साथ पलामू से दिल्ली कूच कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास का घेराव किया जाएगा। यह घोषणा झारखंड के पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी ने की। उन्होंने केंद्र सरकार पर आम लोगों की गाढ़ी कमाई पर अतिरिक्त बोझ डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में देशवासियों की मेहनत की कमाई अमेरिकी कंपनियों को नहीं जाने दी जाएगी।

त्रिपाठी ने कहा कि केंद्र सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता बैंकों से अपनी राशि निकालकर नकद लेन-देन करेंगे। साथ ही उन्होंने देशवासियों से भी बैंकों से पैसे निकालने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों के बैंक खाते खुलवाने पर जोर दिया। इसके बाद यूपीआई के माध्यम से लेन-देन को बढ़ावा दिया। उस समय डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क का भार पड़ने की बात नहीं कही गई थी। अब लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।

पूर्व मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम से आम लोगों में असंतोष है। उन्होंने इसे देशवासियों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर इसे स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

रूस से सस्ता तेल, फिर देश में महंगा क्यों : त्रिपाठी

त्रिपाठी ने रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने का दावा करते हुए कहा कि इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सस्ता तेल खरीदा जा रहा है तो देश में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक क्यों है। उन्होंने कहा कि सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत कम कर आम लोगों को राहत देनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों का बोझ लगातार आम जनता पर पड़ रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे और आम लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन करेंगे।

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