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एमएमडीआर संशोधन बिल के खिलाफ झामुमो का हल्लाबोल, मनोज चौधरी और शकुंतला महाली ने बताया काला कानून

रिपोर्ट: MANISH 1 घंटे पहलेझारखण्ड

खनिज संपदा और संघीय ढांचे पर कुठाराघात का आरोप, सरायकेला प्रखंड मुख्यालय में झामुमो का एक दिवसीय धरना

एमएमडीआर संशोधन बिल के खिलाफ झामुमो का हल्लाबोल, मनोज चौधरी और शकुंतला महाली ने बताया काला कानून

सरायकेला : केंद्र सरकार द्वारा लाए गए माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन (एमएमडीआर) संशोधन बिल के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने सरायकेला प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। धरने में बड़ी संख्या में पार्टी नेता, कार्यकर्ता एवं महिलाएं शामिल हुईं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एमएमडीआर संशोधन बिल को राज्य के खनिज संसाधनों और संघीय ढांचे के लिए नुकसानदेह बताया। धरने को संबोधित करते हुए सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष सह झामुमो नेता मनोज चौधरी ने एमएमडीआर संशोधन बिल को काला कानून करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संविधान और संघीय ढांचे की मूल भावना के खिलाफ काम कर रही है। चौधरी ने कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर रही है लेकिन केंद्र की नीतियों से राज्य की वित्तीय स्थिति और अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र की नीतियों के माध्यम से चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। चौधरी ने कहा कि झामुमो इस कानून के खिलाफ चरणबद्ध तरीके से संवैधानिक आंदोलन चलाएगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। वहीं पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सह झामुमो नेत्री शकुंतला महाली ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आह्वान पर प्रखंड स्तर से आंदोलन का शंखनाद किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने एमएमडीआर संशोधन बिल को वापस नहीं लिया तो झामुमो कार्यकर्ता प्रखंड से लेकर दिल्ली तक आंदोलन करेंगे। महाली ने आरोप लगाया कि यह कानून झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों को लेकर झामुमो किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप का विरोध करेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। धरने में महिलाओं की बड़ी भागीदारी को लेकर शकुंतला महाली ने कहा कि किसी भी संकट का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है। इसलिए महिलाएं अपने घरेलू दायित्वों के साथ-साथ अपने हक और अधिकार की लड़ाई में भी आगे आई हैं। धरना-प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से एमएमडीआर संशोधन बिल को वापस लेने की मांग की।

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