मोतीलेदा में बालू का अवैध कारोबार चरम पर, ग्रामीणों का जीना मुहाल
डीसी को आवेदन: रोज लगभग 200 ट्रैक्टरो से ढुलाई, खेत बर्बाद, हादसे का खतरा

एनजीटी के आदेश बेअसर, पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल*
गिरिडीह/बेगाबाद: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा नदियों से बालू उठाव पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद बेगाबाद थाना क्षेत्र में अवैध बालू तस्करी का खेल खुलेआम जारी है। एनजीटी के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
बेगाबाद थाना क्षेत्र की मोतीलेदा पंचायत में अवैध बालू उठाव चरम पर है। इससे परेशान होकर ग्रामीण मुकेश कुमार यादव, राम कुमार व अन्य ने मंगलवार को उपायुक्त, गिरिडीह को आवेदन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
दिन-दहाड़े जेसीबी से खनन जारी स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बालू माफिया दिन के उजाले में ही नदी घाटों पर जेसीबी लगाकर बालू का अवैध खनन कर रहे हैं। ट्रैक्टरों में लोड कर बिना रॉयल्टी व चालान के बालू को जिले व आसपास के इलाकों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। NGT ने पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए मानसून अवधि में नदियों से बालू उठाव पर पूर्ण रोक लगाई है। इसके बावजूद मोतीलेदा, कोसी, बरदौनी सहित दर्जनों घाटों से अवैध खनन जारी है। इससे नदियों का स्वरूप बिगड़ रहा है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
ग्रामीणों ने आवेदन में लगाया ये आरोप
डीसी को दिए आवेदन में ग्रामीणों ने कहा है कि पंचायत क्षेत्र में प्रतिदिन सुबह 3 बजे से शाम 6 बजे तक लगभग 200 ट्रैक्टर अवैध रूप से बालू की ढुलाई कर रहे हैं।
- आवागमन ठप: दिनभर ट्रैक्टरों के काफिले से सड़क पर चलना दूभर हो गया है। स्कूली बच्चों व बीमारों को भारी परेशानी हो रही है।
- हादसे का खतरा: बेलगाम रफ्तार से दौड़ते ट्रैक्टरों से कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
- खेती बर्बाद: नदी किनारे खेत होने के कारण अवैध खनन से खेतों में दरारें पड़ रही हैं और कटाव तेज हो गया है। फसल चौपट हो रही है।
पुलिस-खनन विभाग पर सांठगांठ का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की उदासीनता से माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस की गाड़ियां बालू लदे ट्रैक्टरों के बगल से गुजर जाती हैं, लेकिन रोकने की जहमत नहीं उठातीं। इससे पुलिस और माफिया की मिलीभगत साफ जाहिर होती है।
डीसी से गुहार, आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने उपायुक्त से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने, अवैध घाटों को तत्काल बंद कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर आंदोलन को बाध्य होंगे।
फिलहाल इस आवेदन पर जिला प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।