बिरनी में भू-माफियाओं का बढ़ा दुस्साहस, शिकायत के 19 दिन बाद भी एफआईआर नहीं, थाना प्रभारी पर पक्षपात के आरोप
पुलिस की मौजूदगी में भरी गई खुदी हुई खाई, पीड़ित ने लगाया दोषियों को बचाने और प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी का आरोप

गिरिडीह : जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत थाना रोड स्थित बिराजपुर में भूमि विवाद से जुड़े एक मामले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार ने बिरनी थाना प्रभारी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने शिकायत मिलने के बावजूद समय पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की और मामले को गंभीर आपराधिक घटना के बजाय सामान्य प्रक्रिया में डालकर आरोपियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि एक विशेष राजनीतिक दल और प्रभावशाली भू-माफिया समूह के दबाव में पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने से बच रही है। जानकारी के अनुसार यह मामला बिराजपुर स्थित खाता संख्या-1, प्लॉट संख्या-447, रकबा 25 डिसमिल भूमि से जुड़ा हुआ है। पीड़ित मनोहर कृष्ण सहाय का कहना है कि उक्त भूमि उनके परिवार के नाम लगभग 50 वर्ष पूर्व सरकारी बंदोबस्ती के माध्यम से आवंटित की गई थी। भूमि की जमाबंदी वर्षों से कायम है तथा नियमित रूप से राजस्व रसीद भी निर्गत होती रही है। इसके बावजूद कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों की नजर इस जमीन पर पड़ गई और विवाद उत्पन्न किया गया। पीड़ित के अनुसार 25 मई 2026 को वह अपनी जमीन पर जेसीबी मशीन से ट्रेंच (खाई) खुदवा रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने वहां पहुंचकर कार्य रुकवा दिया। आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों ने कथित रूप से 15 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की। विरोध करने पर मनोहर कृष्ण सहाय के साथ धक्का-मुक्की की गई तथा उनके पास मौजूद लगभग 17 हजार रुपये नगद छीन लिए गए। बीच-बचाव करने पहुंचे उनके भतीजे राजीव सहाय के साथ भी मारपीट की गई और उनसे तीन हजार रुपये तथा सोने की चेन छीन लेने का आरोप लगाया गया है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस की उपस्थिति के बावजूद स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया। शिकायत के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों को बुलाकर जेसीबी से खुदी हुई खाई को पुनः भर दिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ जिससे निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर संदेह और गहरा गया। पीड़ित का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद जब वे शिकायत दर्ज कराने बिरनी थाना पहुंचे तो उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। बाद में 26 मई 2026 को उन्होंने डाक के माध्यम से थाना प्रभारी को आवेदन भेजा और साथ ही मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार तथा डीएसपी-1 नीरज कुमार को भी दी। आवेदन में थाना स्तर पर कथित लापरवाही, समय पर पुलिस बल नहीं भेजने और शिकायत वापस करने जैसे आरोप लगाए गए। बताया जाता है कि डीएसपी-1 के निर्देश के बाद सरिया पुलिस निरीक्षक ने बिरनी थाना को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया और पीड़ित परिवार को 7 जून को थाना बुलाया गया। हालांकि पीड़ित का आरोप है कि जब वे निर्धारित तिथि पर थाना पहुंचे तो थाना प्रभारी उपस्थित नहीं थे और मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के लगभग 14 दिन बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके बजाय 8 जून 2026 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत कार्रवाई कर मामले को सीमित दायरे में रखने का प्रयास किया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह कदम वास्तविक आरोपियों को बचाने और मामले की गंभीरता को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी शिकायत में मारपीट, लूटपाट, रंगदारी मांगने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने अथवा कब्जे के प्रयास जैसे आरोप हों तो पुलिस को तथ्यों की जांच कर आवश्यकतानुसार प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए। वहीं पुलिस अधिकारियों का पक्ष अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इधर पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमि विवाद से जुड़े मामलों में प्रशासन की निष्पक्षता और त्वरित कार्रवाई बेहद आवश्यक है, ताकि कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहे। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, शिकायत पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा कथित दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल मामला प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर विचाराधीन है तथा पीड़ित पक्ष न्याय की उम्मीद में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप का इंतजार कर रहा है।