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गद्देदार कुर्सी छोड़ सीढ़ियों पर बैठे नगर आयुक्त, कर्मचारियों के बीच पहुंचकर जीता भरोसा

रिपोर्ट: Amit Sahay7 घंटे पहलेझारखण्ड

झाड़ू उठाकर दिया स्वच्छता का संदेश, नगर आयुक्त विजय सिंह बिरुआ के जमीनी अंदाज की हर ओर चर्चा

गद्देदार कुर्सी छोड़ सीढ़ियों पर बैठे नगर आयुक्त, कर्मचारियों के बीच पहुंचकर जीता भरोसा

गिरिडीह : प्रशासनिक अधिकारियों की छवि अक्सर एसी कमरों और औपचारिक बैठकों तक सीमित मानी जाती है लेकिन गिरिडीह के नए नगर आयुक्त विजय सिंह बिरुआ ने अपने कार्यशैली से इस धारणा को बदलने का प्रयास किया है। मंगलवार सुबह उन्होंने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जिसकी चर्चा पूरे शहर में हो रही है। हाफ पैंट और नंगे पांव नगर निगम कार्यालय पहुंचे नगर आयुक्त ने गद्देदार कुर्सी और वातानुकूलित कक्ष की बजाय मुख्य द्वार की सीढ़ियों पर बैठकर निगम के कामकाज का जायजा लिया। मॉर्निंग वॉक के दौरान सीधे निगम कार्यालय पहुंचे नगर आयुक्त को सीढ़ियों पर बैठा देखकर सफाईकर्मी, मजदूर और अन्य कर्मचारी हैरान रह गए। कई लोगों ने उन्हें कार्यालय कक्ष में चलने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने कर्मचारियों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनना अधिक उचित समझा। लगभग दो घंटे तक उन्होंने सफाईकर्मियों से संवाद किया उनकी परेशानियां जानीं और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की। नगर आयुक्त विजय सिंह बिरुआ ने कहा कि निगम के कर्मचारी भी एक परिवार का हिस्सा हैं और उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए उनके बीच रहना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एसी कमरों में बैठकर जमीनी हकीकत को नहीं समझा जा सकता। यही कारण है कि उन्होंने कर्मचारियों के साथ सीधे संवाद को प्राथमिकता दी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बिना यूनिफॉर्म के पहुंचे कर्मियों को अनुशासन का महत्व बताया। इतना ही नहीं उन्होंने स्वयं झाड़ू उठाकर सफाईकर्मियों को स्वच्छता कार्य का बेहतर तरीका भी समझाया। उपस्थिति पंजी की जांच करने के साथ-साथ फायर सेफ्टी उपकरणों का भी निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। नगर आयुक्त ने शहरवासियों से भी स्वच्छता अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जहां कहीं भी गंदगी या कचरे की समस्या दिखाई दे उसकी सूचना तुरंत नगर निगम को दें ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। पूर्व में गिरिडीह के अपर समाहर्ता रह चुके विजय सिंह बिरुआ का यह सरल, संवेदनशील और जमीनी जुड़ाव वाला अंदाज लोगों को प्रभावित कर रहा है। कर्मचारियों में भी उनके व्यवहार से नया उत्साह देखने को मिल रहा है। उनके इस कदम ने यह संदेश दिया है कि प्रशासन की असली ताकत जनता और कर्मचारियों के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करने में है।

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