बस स्टैंड और डीप बोरिंग योजनाओं में अनियमितता पर मधुश्री महतो सख्त, जिला अभियंता से जांच रिपोर्ट मांगी
ईचागढ़ की विकास योजनाओं की गुणवत्ता पर उठे सवाल, जिप उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने एक सप्ताह में कार्रवाई का दिया निर्देश

कुकड़ू : सरायकेला-खरसावां जिला परिषद की उपाध्यक्ष एवं स्वास्थ्य एवं शिक्षा तथा महिला, शिशु एवं सामाजिक कल्याण स्थायी समिति की अध्यक्ष मधुश्री महतो ने ईचागढ़ प्रखंड की विकास योजनाओं में कथित अनियमितता और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर जिला अभियंता को पत्र भेजकर बिंदुवार जांच कराने का निर्देश दिया है। मधुश्री महतो द्वारा जारी पत्रांक 29/2026, दिनांक 28 जुलाई 2026 में प्रखंड ईचागढ़ के गौरांगकोचा में निर्माणाधीन नए बस स्टैंड तथा कुकड़ू प्रखंड के सिंदुरपुर एवं सिरूम क्षेत्र में डीप बोरिंग सह जलमीनार योजनाओं की शिकायतों का उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार ग्रामीणों की शिकायत के आलोक में 26 जुलाई 2026 को क्षेत्र भ्रमण तथा 25 जुलाई को स्थानीय स्तर पर की गई जांच के दौरान गौरांगकोचा बस स्टैंड निर्माण में कुल 17 पिलर की नींव खोदे जाने की बात सामने आई। पत्र में आरोप लगाया गया है कि कई पिलरों की नींव महज 2 से 2.5 फीट तक ही खोदी गई है। साथ ही पिलर के नीचे आरसीसी फुटिंग में सीमेंट, बालू एवं गिट्टी के मिश्रण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि पिलरों में सड़क की मोटाई और सरिया की संख्या प्राक्कलन के अनुरूप नहीं दिखी। वहीं जिला परिषद की 15वें वित्त आयोग की राशि से कुकड़ू प्रखंड के सिंदुरपुर (मुस्लिम टोला) एवं शहीद चौक, सिरूम में निर्मित डीप बोरिंग सह जलमीनार योजनाओं में भी प्राक्कलन के विपरीत कार्य किए जाने की ग्रामीणों की शिकायत का उल्लेख पत्र में किया गया है। इसमें डीप बोरिंग की गहराई, तीन लेयर पानी टंकी, सबमर्सिबल पंप, पाइप आदि कार्यों की जांच कराने को कहा गया है। मधुश्री महतो ने कहा कि सरकारी राशि से संचालित योजनाओं की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने योजनाओं की तकनीकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने तथा दोष पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने जिला अभियंता को निर्देश दिया है कि सभी योजनाओं की अलग-अलग बिंदुवार जांच कर एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए ताकि शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।