JSSC-CGL पेपर लीक मामला मे CID-SIT को बड़ी कामयाबी, गिरिडीह से एक और अभ्यर्थी गिरफ्तार, 5 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
CID सूत्रों के अनुसार, पूर्व में गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी से हुई कड़ी पूछताछ में समीर कुमार का नाम सामने आया था।

गिरिडीह: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की CGL परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले में CID की SIT की शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। SIT ने इस मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरिडीह जिले के बेंगाबाद से सफल अभ्यर्थी समीर कुमार को गिरफ्तार किया है। वहीं जांच में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी वेबेल और गुड़गांव की प्रिंटिंग प्रेस ICN के बीच करीब 5 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का भी पर्दाफाश हुआ है।
अभय तिवारी ने उगले राज
CID सूत्रों के अनुसार, पूर्व में गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी से हुई कड़ी पूछताछ में समीर कुमार का नाम सामने आया था। अभय ने खुलासा किया था कि बेंगाबाद निवासी समीर कुमार न सिर्फ खुद फर्जीवाड़ा कर परीक्षा पास हुआ, बल्कि वह इस रैकेट में बिचौलिए की भूमिका निभा था और अन्य अभ्यर्थियों को भी सेटिंग के लिए गिरोह से मिलवाता था। इस इनपुट के आधार पर SIT ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बेंगाबाद में छापेमारी कर समीर को गिरफ्तार कर लिया। उससे भी पूछताछ जारी है।
गोपनीयता ताक पर, पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर छपवाए 19 लाख प्रश्न पत्र
JSSC ने परीक्षा के आयोजन का जिम्मा पश्चिम बंगाल सरकार की PSU कंपनी वेबेल को दिया था। नियम के मुताबिक वेबेल को पूरी गोपनीयता के साथ परीक्षा करानी थी, लेकिन वेबेल ने नियमों को दरकिनार करते हुए प्रश्न पत्र और OMR शीट छापने का काम हरियाणा के गुड़गांव स्थित निजी प्रिंटिंग प्रेस ICN को दे दिया। जांच में पता चला है कि लगभग 19 लाख प्रश्न पत्रों की छपाई के लिए वेबेल ने ICN प्रेस को प्रति प्रश्न पत्र 25 से 30 रुपये की दर से करीब 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया। CID को शक है कि पेपर लीक का असली खेल इसी प्रिंटिंग प्रेस से ही शुरू हुआ।
वेबेल के दो अधिकारी 5 दिन की रिमांड पर
इस मामले में कोलकाता स्थित वेबेल के दफ्तर पर छापेमारी के बाद CID ने वहां से कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। साथ ही परीक्षा की गतिविधियों को संभालने वाले दो मुख्य कर्मियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया है। कोर्ट से अनुमति लेकर दोनों आरोपियों को 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। SIT को उम्मीद है कि इन दोनों से पूछताछ के बाद इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड और इसमें शामिल सफेदपोशों के नाम सामने आएंगे।