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विश्रामपुर प्रखंड के तत्कालीन एमओ रमेश चन्द्र प्रसाद को पांच वर्ष सश्रम कारावास की सजा

रिपोर्ट: Shailendra Tiwary18 घंटे पहलेझारखण्ड

भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत सुनता गया फैसला

विश्रामपुर प्रखंड के तत्कालीन एमओ रमेश चन्द्र प्रसाद को पांच वर्ष सश्रम कारावास की सजा

मेदिनीनगर (पलामू) : पलामू जिला व्यवहार न्यायालय के एंटी करप्शन ब्यूरो के स्पेशल जज राज कुमार मिश्र की अदालत ने पलामू जिला अंतर्गत विश्रामपुर प्रखंड के तत्कालीन प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी रमेश चन्द्र प्रसाद को प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13(2) r/w13 (1) (d) में दोषी पाते हुए पांच वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाया है। वही 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थ दंड की राशि नही देने पर तीन माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। वही प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा सात में चार वर्ष सश्रम कारावास की सजा व 20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की राशि नही देने पर तीन माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। दोनों सजाए साथ- साथ चलेगी।

इस सम्बंध में विश्रामपुर निवासी मुनीर आलम ने निगरानी विभाग में तत्कालीन विश्रामपुर प्रखण्ड के प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी रमेश चन्द्र प्रसाद के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराया था। जो निगरानी रांची थाना कांड संख्या 33/2014 तिथि 15 अक्टूबर 2014 को रमेश चन्द्र प्रसाद के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा सात व 13 (2) के तहत प्राथमिकी दर्ज किया गया था।

अभियुक्त पर आरोप था कि दिनांक 10 अक्टूबर 2014 को विश्रामपुर प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थे। लोक सेवक रहते हुए विश्रामपुर प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर रहते हुए सूचक मुनीर आलम से अपने वैध पारिश्रमिक के अलावा इनाम या लालच का नियत करते हुए प्रति क्विंटल खाद्यान उठाव 10 रुपये की मांग की जो प्रतिदिन कूल तीन से चार क्विंटल खाद्यान का उठाव होता था। आर्थात अभियुक्त के द्वारा प्रतिदिन तीन हजार से चार हजार रुपये नाजायज रिश्वत लेने के बाद ही खाद्यान उठाने की अनुमति दी जाती थी।

सूचक ने 10 अक्टूबर 2014 को पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक व्यूरो रांची को आवेदन दिया था कि प्रति क्विंटल खाद्यान उठाने में 10 रुपये की मांग अभियुक्त के द्वारा किया जाता है। प्रति दिन तीन से चार क्विंटल खाद्यान उठाव होता है। इसका करीब तीन से चार हजार रुपये लेकर ही खाद्यान उठाने की अनुमति देते थे, जो नियमानुकूल नहीं था। दिनांक 17 अक्टूबर 2014 को अभियुक्त के द्वारा आवेदक से घूस के रूप में तीन हजार रुपये की मांग किए जाने पर आवेदक द्वारा अभियुक्त को घूस की रकम तीन हजार रुपये दिया गया । तत्पश्चात स्वतंत्र साक्षियों के समक्ष निगरानी ब्यूरो के सदस्यों ने अभियुक्त को तीन हजार घूस की रकम के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया।गिरफ्तारी के दौरान अभियुक्त के दोनों हाथों का सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाने पर धोवन का रंग गुलाबी हो गया था । अदालत ने साक्ष्य के आधार पर दोषी पाते हुए विजिलेंस केस नंबर 44 /2014 के आरोपी रमेश चंद्र प्रसाद को सजा सुनाई है।

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