भंडरा के हाटी में ग्रामसभा का बड़ा फैसला: पादरी व पास्टरो के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध
झारखंड राज्य में पहली बार किसी गांव में धर्मांतरण रोकने के लिया लगाया गया बोर्ड

By Roshan Shahdeo **बाहरी धर्म प्रचार और धार्मिक आयोजनों पर रोक, पेसा कानून के तहत ग्राम सभा ने लगाया बोर्ड ** भंडरा। राज्य में आदिवासियों के धर्मांतरण के खिलाफ आदिवासी समाज पूरी तरह से गोलबंद हो गया है। झारखंड के इतिहास में पहली बार लोहरदगा जिले से एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया गया है। जिले के भंडरा प्रखंड क्षेत्र के हाटी गांव में आदिवासी संगठनों और समाजसेवियों के नेतृत्व में ग्राम सभा ने एक बड़ा प्रस्ताव पास किया है। इस प्रस्ताव के तहत गांव में क्रिश्चियन मिशनरी के पादरियों, पास्टरों और ईसाई धर्म से जुड़ी किसी भी प्रकार की प्रार्थना सभा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस फैसले को सख्ती से लागू करने के लिए ग्रामीणों ने गांव के बाहर बाकायदा एक बोर्ड भी लगा दिया है। भंडरा प्रखंड के उदरंगी पंचायत के हाटी ग्राम में शुक्रवार को ग्रामसभा ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए गांव में पादरी व पास्टर के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। झारखंड राज्य में ये पहली घटना है जिसमें धर्मांतरण के खिलाफ किसी गांव में इस तरह का बोर्ड लगाया गया है। ग्रामसभा के प्रस्ताव के बाद गांव के तीन प्रवेश मार्ग पर बड़ा सूचना बोर्ड लगाया गया है, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि पादरी व पास्टर का प्रवेश सख्त मना है। सुचना बोर्ड विधिवत उद्घाटन ग्राम प्रधान विद्यासागर पहान,आयकर आयुक्त निशा उरांव,राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा केंद्रीय अध्यक्ष बिरसा उरांव, केंद्रीय सचिव सोमा उरांव,केंद्रीय महासचिव जलेश्वर उरांव,केंद्रीय उपाध्यक्ष सोमे उरांव,जिला धर्म गुरु बंधे उरांव,सहित सैकड़ो अतिथियों द्वारा किया गया।
झारखंड में पहली बार ऐसा कदम स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि झारखंड में धर्मांतरण के मुद्दे पर इस तरह का कड़ा और संगठित कदम पहली बार किसी ग्राम सभा द्वारा उठाया गया है। आदिवासी नेताओं का कहना है कि यह कदम किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी सदियों पुरानी सरना संस्कृति और परंपराओं को बचाने की एक आत्मरक्षा प्रणाली है। इस घटना के बाद से पूरे लोहरदगा जिले और आसपास के क्षेत्रों में यह मामला भारी चर्चा का विषय बना हुआ है।
पेसा कानून के तहत लिया गया निर्णय ग्रामसभा ने यह फैसला पेसा अधिनियम, 1996 के तहत लिया है। हाटी गांव अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून ग्रामसभा को स्थानीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का अधिकार देता है। बोर्ड में उल्लेख है कि ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर गांव में किसी भी धर्म के पादरी, पादरियों एवं बाहर से आने वाले धर्मांतरण से जुड़े व्यक्तियों के प्रवेश तथा धार्मिक प्रार्थना या आयोजन पर रोक लगाई जाती है।
हाटी ग्रामसभा के फैसले के मुख्य बिंदु
पादरी व पादरियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध का बोर्ड लगाया,बाहरी धर्म प्रचारकों और धर्मांतरण से जुड़े व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक,धार्मिक प्रार्थना या आयोजन पर रोक का उल्लेख,पेसा अधिनियम, 1996 का हवाला देकर निर्णय लिया गया.
हाटी में बढ़ रही ग्रामसभाओं की सक्रियता
हाटी और अम्बेरा में हाल के वर्षों में ग्रामसभाओं द्वारा पारंपरिक जनजातीय पहचान और संस्कृति के संरक्षण को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए हैं। हाटी का निर्णय भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे पूरे जिले में नई सामाजिक बहस शुरू हो गई है।
ग्राम प्रधान सह पहान ने कहा -यह सर्वसम्मति से लिया गया फैसला
हाटी गांव के ग्राम प्रधान व पहान बिद्यासागर पहान ने कहा ग्रामसभा गांव की सर्वोच्च संस्था है। हमारे पूर्वजों की परंपरा, जनजातीय संस्कृति, देवी-देवताओं में आस्था और सामाजिक व्यवस्था की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया है। यह निर्णय किसी धर्म या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और ग्रामसभा के अधिकारों के संरक्षण के उद्देश्य से लिया गया है। गांव में आने वाला हर व्यक्ति ग्रामसभा के निर्णय और स्थानीय परंपराओं का सम्मान करे।
सरना-सनातन एकता तोड़ने की साजिश नहीं होने देंगे सफल: वीएचपी नेता भीमनाथ शाहदेव
विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री भीमनाथ शाहदेव ने कहा कि सदियों से चली आ रही सरना-सनातन एकता को तोड़ने की साजिश रची जा रही है, जिसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरना और सनातन दोनों प्रकृति पूजक हैं और सिद्धांत एक हैं। भीमनाथ सहदेव ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व और विदेशी ताकतें 'फूट डालो' की नीति पर काम कर सरना-सनातन समाज को बांटने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा, इनके नापाक मंसूबों को किसी भी हाल में सफल नहीं होने देंगे। विदेशी और देश विरोधी ताकतों को सरना-सनातन समाज मुंहतोड़ जवाब देगा।
आयकर आयुक्त निशा उरांव ने खुद उठाया ब्रश, बोर्ड पर लिखा प्रतिबंध का संदेश
ग्राम हाटी में पादरी-पास्टर के प्रवेश पर रोक का बोर्ड तैयार करती दिखीं
भंडरा प्रखंड के ग्राम हाटी में पादरी-पास्टर के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए लगाए गए सूचना बोर्ड को आयकर आयुक्त निशा उरांव ने खुद ब्रश उठाकर लिखना शुरू किया। बोर्ड पर लिखा है कि पादरी पास्टर का प्रवेश सख्त मना है और पेसा अधिनियम के तहत ग्रामसभा को अपनी परंपरा एवं रूढ़िवादी संस्कृति के संरक्षण का अधिकार है। इसी आधार पर ईसाई धर्म के पास्टर-पादरी, बाहर से आने वाले धर्मांतरित व्यक्तियों और किसी भी धार्मिक प्रार्थना-आयोजन पर रोक लगाई गई है।
ग्रामसभा के फैसले को जमीन पर उतारा
इससे पहले निशा उरांव ने कहा था कि धर्मांतरण को लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक आदिवासियों के पक्ष में फैसला आया है। झारखंड में पहली बार बोर्ड लगाकर धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है और यह मुहिम पूरे प्रदेश में चलाई जाएगी। अब खुद बोर्ड लिखकर उन्होंने ग्रामसभा के फैसले को सार्वजनिक रूप से समर्थन दे दिया है। कार्यक्रम में राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा केंद्रीय अध्यक्ष बिरसा उरांव, केंद्रीय सचिव सोमा उरांव,केंद्रीय महासचिव जलेश्वर उरांव,केंद्रीय उपाध्यक्ष सोमे उरांव,जिला धर्म गुरु बंधे उरांव,सहित दर्जनों वक्तावनी अपने संबोधन में धर्म प्रचारक के विरुद्ध उलगुलान की बात कही. सभी ने सरना समुदाय को एकजुट रहने की अपील की
/बोर्ड में क्या लिखा है*
ग्राम हाटी, थाना-भंडरा, जिला-लोहरदगा पेसा अधिनियम के अंतर्गत आता है। ग्रामसभा के प्रस्ताव पर ईसाई धर्म के पास्टर-पादरी, धर्मांतरित व्यक्तियों का प्रवेश और धार्मिक आयोजन पर रोक लगाई जाती है।