हाथियों के आतंक पर विधायक के बयान से बढ़ा विवाद, “हाथियों को बांधकर नहीं रख सकते” टिप्पणी पर ग्रामीणों में नाराजगी
घर टूट रहे, लोग घायल हो रहे लेकिन समाधान नहीं दे पा रहे जनप्रतिनिधि : विस्थापित मंच

चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में बढ़ते हाथी आतंक के बीच विधायक सविता महतो का बयान अब विवादों में घिर गया है। हाथियों के हमलों से लगातार हो रहे जान-माल के नुकसान के बीच विधायक द्वारा दिए गए हाथियों को बांधकर नहीं रख सकते वाले बयान को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, समाजसेवियों और विस्थापित अधिकार मंच ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एक शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान हाथी समस्या पर पूछे गए सवाल के जवाब में विधायक सविता महतो ने कहा कि हाथी जंगल में भोजन नहीं मिलने के कारण गांवों की ओर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाथी अपना पेट भरने के लिए इधर-उधर घूमते हैं, हम आप या कोई भी उन्हें बांधकर नहीं रख सकते। विधायक ने यह भी कहा कि सरकार जंगलों में हाथियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने को लेकर कई योजनाओं पर काम कर रही है। साथ ही उन्होंने सदन में हाथी हमलों में मृत लोगों के मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग उठाने की बात कही। हालांकि विधायक के इस बयान से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। समाजसेवियों का कहना है कि लगातार बढ़ते हाथी आतंक के बीच जनता समाधान चाहती है लेकिन जनप्रतिनिधियों की ओर से केवल बयानबाजी हो रही है। विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि हर साल घर टूट रहे हैं फसलें बर्बाद हो रही हैं और लोग घायल या मौत का शिकार हो रहे हैं लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं दिख रही। गौरतलब है कि हाल ही में कुकड़ू के आदरडीह चौका गांव में हाथी ने ग्राम प्रधान गुरुपद गोप का घर तोड़ दिया था जिसमें उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। वहीं गुरुवार रात लेटेमदा रेलवे स्टेशन के समीप गणेश मंदिर के पास जंगली हाथी ने उत्तम महतो का मकान पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और घर में रखा अनाज भी बर्बाद कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार समय रहते परिवार बाहर नहीं निकलता तो बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों ने मांग की है कि हाथी कॉरिडोर को पुनर्जीवित किया जाए, जंगलों में चारा-पानी की समुचित व्यवस्था हो तथा प्रभावित गांवों में स्थायी क्विक रिस्पांस टीम (QRT) तैनात की जाए। लोगों का कहना है कि अब केवल मुआवजे और बयान से काम नहीं चलेगा बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।