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जेपीएससी विवाद पर सांसद सुखदेव भगत का भाजपा पर सीधा वार, बोले- गतिरोध खत्म, अब ‘स्पेस’ तलाश रही भाजपा

रिपोर्ट: Roshan Sahdeo21 घंटे पहलेझारखण्ड

98 प्रतिशत मांगें मानी गईं, पीटी रद्द और आयोग के अध्यक्ष समेत तीन सदस्यों का इस्तीफा, मनी ट्रांजैक्शन की ईडी जांच की मांग

जेपीएससी विवाद पर सांसद सुखदेव भगत का भाजपा पर सीधा वार, बोले- गतिरोध खत्म, अब ‘स्पेस’ तलाश रही भाजपा

लोहरदगा : जेपीएससी परीक्षा विवाद को लेकर लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों की विवाद से जुड़ी 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं, जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द कर दी गई है और आयोग के अध्यक्ष समेत तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में अब गतिरोध की कोई स्थिति नहीं बची है लेकिन भाजपा राजनीतिक रूप से अपना ‘स्पेस’ तलाशने के लिए इस मुद्दे को हवा देने का प्रयास कर रही है। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि पिछले दिनों हुई घटनाओं के बाद अभ्यर्थियों की अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं और जेपीएससी पीटी रद्द कर दी गई है। अध्यक्ष के साथ तीन सदस्य थे उन सभी का त्यागपत्र हो गया है। सांसद ने इसे विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। जेपीएससी प्रकरण में कथित मनी ट्रांजैक्शन के आरोपों को लेकर सांसद ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक लेन-देन के आरोप सामने आए हैं तो पूरे मामले की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की जवाबदेही तय हो सके। भाजपा पर निशाना साधते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि अब गतिरोध कहीं नहीं है। भारतीय जनता पार्टी स्पेस ढूंढ रही है लेकिन उसे स्पेस नहीं मिल रहा है। इसलिए इस प्रकार की बातें कुछ न कुछ कही जा रही हैं। उनके इस बयान को जेपीएससी विवाद को लेकर भाजपा की भूमिका पर सीधा राजनीतिक प्रहार माना जा रहा है। सांसद ने मामले की जांच कर रही सीआईडी की कार्यशैली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कम समय में जिस तेजी से सीआईडी ने जांच आगे बढ़ाई है वह प्रशंसनीय है। सीआईडी बहुत अच्छा काम कर रही है और इतने कम समय में जिस प्रकार उन्होंने कार्य किया है वे प्रशंसा के पात्र हैं। सुखदेव भगत ने कहा कि अब आवश्यकता पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को आगे बढ़ाने, आर्थिक लेन-देन से जुड़े आरोपों की भी जांच कराने और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की है।

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