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संसद परिसर में सांसद सुखदेव भगत का जोरदार प्रदर्शन, बोले- अमित शाह आदिवासियों को वनवासी कहना बंद करें

रिपोर्ट: Roshan Sahdeo21 घंटे पहलेझारखण्ड

आदिवासी हमारी संवैधानिक और ऐतिहासिक पहचान, कोई हमें जंगल तक सीमित नहीं कर सकता

संसद परिसर में सांसद सुखदेव भगत का जोरदार प्रदर्शन, बोले- अमित शाह आदिवासियों को वनवासी कहना बंद करें

लोहरदगा : आदिवासियों की पहचान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कथित बयान के विरोध में लोहरदगा लोकसभा के सांसद सुखदेव भगत ने सोमवार को संसद भवन परिसर के बाहर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सांसद ने आदिवासी समाज की संवैधानिक एवं ऐतिहासिक पहचान का सम्मान करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान स्वयं तय करेगा और उसे ‘वनवासी’ कहकर उसकी अस्मिता को सीमित नहीं किया जा सकता। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि अमित शाह आदिवासियों को वनवासी कहना बंद करें। आदिवासी हमारी पहचान है, हमारा अधिकार है और हमारी ऐतिहासिक विरासत है। उन्होंने कहा कि ‘आदिवासी’ शब्द महज संबोधन नहीं बल्कि संविधान, इतिहास और भारतीय सामाजिक संरचना में स्थापित एक महत्वपूर्ण पहचान है। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इस दिवस का उद्देश्य दुनिया भर के आदिवासी समुदायों की पहचान, अधिकार, संघर्ष, संस्कृति और विरासत को सम्मान देना है। ऐसे समय में आदिवासी समाज को उसकी मूल पहचान से अलग संबोधित किया जाना चिंता का विषय है। भगत ने जोर देकर कहा कि पहचान हम तय करेंगे। हमारी पहचान आदिवासी है। आदिवासी संवैधानिक और ऐतिहासिक पहचान हैं। कोई हमें वनवासी कहकर जंगल तक सीमित नहीं कर सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहने की प्रवृत्ति उनकी व्यापक सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक पहचान को सीमित करने का प्रयास है। सांसद ने कहा कि आदिवासी समाज केवल जंगलों से जुड़ा समुदाय नहीं है बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा का महत्वपूर्ण वाहक रहा है। उन्होंने कहा कि जल-जंगल-जमीन, भाषा, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। सुखदेव भगत ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान, अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लगातार आवाज उठाता रहेगा। संसद परिसर में हुए प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार से आदिवासी समाज की संवैधानिक पहचान और भावनाओं का सम्मान करने की मांग की।

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