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संग्रहालय हमारी सांस्कृतिक चेतना के जीवंत संरक्षक : डॉ. करबी साहा

रिपोर्ट: VBN News Desk3 घंटे पहलेझारखण्ड

अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर योगदा सत्संग महाविद्यालय में आयोजित हुआ ज्ञानवर्धक कार्यक्रम, 100 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया भाग

संग्रहालय हमारी सांस्कृतिक चेतना के जीवंत संरक्षक : डॉ. करबी साहा

रांची। अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और योगदा सत्संग महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में गरिमामय एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाना था। इसमें इतिहास विभाग के 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान सांस्कृतिक चेतना, ऐतिहासिक संवेदना और बौद्धिक विमर्श का वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और परमहंस योगानंद के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना और गणेश वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।

मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. करबी साहा ने संग्रहालयों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संग्रहालय केवल प्राचीन वस्तुओं के संग्रहण स्थल नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सभ्यता, संस्कृति, कला और ऐतिहासिक चेतना के जीवंत संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पुरावशेषों, शिलालेखों और पांडुलिपियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। डॉ. साहा ने भारत सरकार के ह्यज्ञान भारतमह्ण एप की जानकारी देते हुए बताया कि इसके माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों का डिजिटल संरक्षण और जनसहभागिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी स्थानीय विरासत के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जयेंद्र कुमार ने कहा कि पुरावशेष अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच सशक्त संवाद स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि संग्रहालय विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर इतिहास को प्रत्यक्ष रूप में समझने का अवसर प्रदान करते हैं। किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना उसके इतिहासबोध और मूल्यों की संवाहक होती है।

इतिहास विभाग के डॉ. मनोज शेखर ने भारतीय संस्कृति की प्राचीनता और गौरवपूर्ण परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि संग्रहालय हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों के संवाहक हैं। वे आने वाली पीढ़ियों को गौरवशाली अतीत से परिचित कराते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से इतिहास और पुरातत्व को केवल शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दायित्व के रूप में अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और शासी निकाय के सचिव अश्विनी कुमार सक्सेना ने झारखंड के विभिन्न पुरास्थलों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि झारखंड ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है, लेकिन यहां के कई पुरास्थल आज भी व्यापक जनचेतना से दूर हैं। उन्होंने राज्य में संग्रहालयों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि संग्रहालय सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ समाज में ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव की भावना को भी मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. अमृता दत्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मृत्युंजय कुमार ने किया। उनके संतुलित और साहित्यिक मंच संचालन ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के इस आयोजन ने विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया कि संग्रहालय केवल अतीत की स्मृतियों के संरक्षक नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक आत्मा के जीवंत प्रतीक भी हैं।

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