संसद से दूरी पर घिरे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह, डेढ़ माह तक प्रश्नोत्तर कार्यक्रम नहीं
प्रतिनिधि सभा के कैलेंडर से PM शाह का नाम गायब, विपक्ष ने जवाबदेही पर उठाए सवाल

काठमांडू : नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह एक बार फिर संसद से दूरी बनाए रखने को लेकर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। प्रतिनिधि सभा द्वारा आगामी 30 जून तक जारी संसदीय कैलेंडर में प्रधानमंत्री के संसद में उपस्थित होकर सांसदों के सवालों का जवाब देने का कोई कार्यक्रम शामिल नहीं किया गया है। इसको लेकर विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। संसद सचिवालय द्वारा सार्वजनिक किए गए कैलेंडर के अनुसार, आगामी डेढ़ माह तक प्रधानमंत्री के साथ किसी भी प्रश्नोत्तर सत्र की व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम 56 के तहत प्रत्येक महीने के पहले सप्ताह में एक दिन प्रधानमंत्री के साथ प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित करने का स्पष्ट प्रावधान है। नियम के अनुसार स्पीकर को सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल पूछने के लिए कम से कम एक घंटे का समय निर्धारित करना होता है। नेपाल की संसदीय परंपरा में अब तक अधिकांश प्रधानमंत्रियों ने नियमित रूप से संसद में उपस्थित होकर सांसदों के सवालों के जवाब दिए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह पर लंबे समय से संसद में सक्रिय भागीदारी नहीं करने और सदन के प्रति जवाबदेह नहीं रहने के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रपति के अभिभाषण और सरकार की नीति एवं कार्यक्रम पर हुई चर्चा के दौरान भी प्रधानमंत्री ने स्वयं जवाब नहीं दिया था। उनकी जगह वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने सांसदों के सवालों का उत्तर दिया था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री की लगातार अनुपस्थिति से संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर असर पड़ सकता है। वहीं विपक्षी दलों ने इसे सरकार की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए प्रधानमंत्री से सदन में उपस्थित होकर जनता और जनप्रतिनिधियों के सवालों का जवाब देने की मांग की है।